बोकारो शिक्षा विभाग में 14.65 लाख रुपये का वेतन घोटाला, मृत शिक्षक के नाम पर बिल बनाकर बिलिंग असिस्टेंट के खाते में पहुंची रकम

Meenu | August 4, 2026 | 10:38 AM IST

Samachar Post रिपोर्टर,बोकारो : झारखंड के बोकारो जिले में शिक्षा विभाग में करोड़ों नहीं, लेकिन गंभीर वित्तीय अनियमितता का मामला सामने आया है। विभागीय जांच में खुलासा हुआ है कि वर्ष 2021 में दिवंगत हो चुके एक शिक्षक के अंतर वेतन वृद्धि (एरियर) के नाम पर 14.65 लाख रुपये का भुगतान कथित तौर पर एक बिलिंग असिस्टेंट के बैंक खाते में ट्रांसफर कर दिया गया। मामला सामने आने के बाद शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की जांच शुरू कर दी गई है।

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मृत शिक्षक के नाम पर तैयार हुआ एरियर बिल

जांच रिपोर्ट के अनुसार, पेटरवार प्रखंड के मध्य विद्यालय सदमाकला के शिक्षक संतोष कुमार शर्मा का निधन 14 अगस्त 2021 को हो गया था। इसके बावजूद उनके नाम पर जुलाई 2007 से जून 2024 तक की अंतर वेतन वृद्धि की गणना कर बिल संख्या 77/2024-25 के माध्यम से 4,31,852 रुपये की निकासी की गई। जांच में यह भी सामने आया कि मृत्यु के लगभग दो वर्ष 10 माह बाद की अवधि को भी एरियर गणना में शामिल किया गया, जिसे अधिकारियों ने गंभीर वित्तीय अनियमितता का संकेत माना है। आरोप है कि इसी तरह तीन अलग-अलग बिलों के जरिए कुल 14.65 लाख रुपये का भुगतान कराया गया।

DDO और भुगतान प्रक्रिया पर उठे सवाल

जांच में तत्कालीन डीडीओ सह बीईईओ प्रतिमा दास की भूमिका पर भी सवाल उठे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक भुगतान से पहले आवश्यक दस्तावेजों का सत्यापन और नियमानुसार जांच नहीं की गई। अधिकारियों का कहना है कि डीडीओ पोर्टल की दो-स्तरीय स्वीकृति प्रणाली में निकासी एवं व्ययन पदाधिकारी की मंजूरी के बिना भुगतान संभव नहीं होता। ऐसे में कोषागार संहिता और वित्तीय नियमों के उल्लंघन की आशंका जताई गई है तथा पूरे भुगतान तंत्र की जांच की जा रही है।

वास्तविक लाभुक को समय पर नहीं मिली राशि

नियमों के अनुसार शिक्षक के निधन के बाद एरियर की राशि उनकी पत्नी किरण शर्मा को मिलनी थी। जांच में आरोप लगाया गया है कि बिलिंग इंचार्ज ने तीन किस्तों में कुल 14.65 लाख रुपये अपने खाते में जमा करा लिए और वास्तविक लाभुक को समय पर भुगतान नहीं किया। मामला सामने आने के बाद आरोपी ने चेक के माध्यम से राशि वापस कर दी, लेकिन भुगतान में हुई देरी का ब्याज नहीं चुकाया। अधिकारियों के अनुसार इस अवधि का ब्याज करीब 80 हजार रुपये बनता है।

डिजिटल रिकॉर्ड से खुली गड़बड़ी

डीडीओ पोर्टल के डिजिटल सत्यापन, भुगतान अभिलेखों और अन्य सरकारी रिकॉर्ड की जांच के दौरान पूरी अनियमितता सामने आई। जांच में पाया गया कि भुगतान का विवरण वेतन भरपाई पंजी में दर्ज ही नहीं किया गया था, जबकि यह सरकारी भुगतान का अनिवार्य रिकॉर्ड होता है। जांच अधिकारियों का मानना है कि भुगतान को पंजी में दर्ज नहीं करना कथित रूप से गलत लेनदेन को छिपाने और उसे वैध स्वरूप देने का प्रयास हो सकता है। फिलहाल मामले की विस्तृत जांच जारी है और संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की प्रक्रिया चल रही है।

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