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बांकीपुर उपचुनाव: RJD ने रेखा गुप्ता को बनाया उम्मीदवार, मुकाबला हुआ दिलचस्प

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Samachar Post रिपोर्टर, पटना : बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। महागठबंधन की ओर से राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने रेखा गुप्ता को अपना उम्मीदवार घोषित किया है। उम्मीदवार की घोषणा के साथ ही चुनावी मुकाबला और रोचक हो गया है। रेखा गुप्ता अतिपिछड़ा वर्ग (EBC) से आती हैं और वर्ष 2025 के विधानसभा चुनाव में भी राजद के टिकट पर बांकीपुर सीट से चुनाव लड़ चुकी हैं। क्षेत्र में उनकी सक्रियता, संगठन पर पकड़ और स्थानीय कार्यकर्ताओं के साथ समन्वय को देखते हुए पार्टी नेतृत्व ने एक बार फिर उन्हें चुनावी मैदान में उतारा है। राजद नेताओं का दावा है कि जनता का समर्थन पार्टी के साथ है और इस बार बांकीपुर सीट पर जीत महागठबंधन के खाते में जाएगी।

बीजेपी पर विकास की अनदेखी का आरोप

उम्मीदवार की घोषणा के साथ ही राजद ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर भी निशाना साधा है। पार्टी नेताओं का कहना है कि राजधानी पटना की महत्वपूर्ण सीट होने के बावजूद क्षेत्र में अपेक्षित विकास नहीं हुआ है। राजद के अनुसार, बरसात के दौरान जलजमाव जैसी समस्याएं आज भी लोगों के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई हैं। पार्टी का दावा है कि स्थानीय मुद्दों को लेकर जनता में असंतोष है, जिसका असर चुनाव परिणाम पर पड़ सकता है। रेखा गुप्ता के नाम पर राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के निर्देश पर सहमति बनी। उनके नाम की घोषणा पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने की।

प्रशांत किशोर की एंट्री से बदले समीकरण

इस उपचुनाव की सबसे बड़ी चर्चा जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर का खुद चुनाव मैदान में उतरना है। उनकी उम्मीदवारी से चुनावी मुकाबला त्रिकोणीय होने के संकेत मिल रहे हैं। प्रशांत किशोर रोजगार, शिक्षा, बेहतर प्रशासन और व्यवस्था परिवर्तन जैसे मुद्दों को लेकर शहरी युवाओं, पेशेवर वर्ग और नए मतदाताओं को आकर्षित करने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे में उनके चुनाव लड़ने से पारंपरिक राजनीतिक समीकरणों में बदलाव की संभावना जताई जा रही है।

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विपक्षी वोटों के बंटवारे पर नजर

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि विपक्षी वोटों का बंटवारा होता है तो इसका लाभ बीजेपी को मिल सकता है। वहीं राजद को भरोसा है कि उसका पारंपरिक सामाजिक आधार और संगठनात्मक ताकत उसे मजबूत स्थिति में रखेगी। बांकीपुर विधानसभा सीट को लंबे समय से बीजेपी का मजबूत गढ़ माना जाता है। वर्ष 1995 से इस सीट पर पार्टी का प्रभाव बना हुआ है। ऐसे में यह उपचुनाव केवल एक विधानसभा सीट का चुनाव नहीं, बल्कि बिहार की बदलती राजनीति, नए राजनीतिक विकल्पों और विभिन्न दलों की रणनीति की भी परीक्षा माना जा रहा है। राजनीतिक जानकारों के अनुसार, बांकीपुर का परिणाम आने वाले समय में बिहार की सियासत की दिशा तय करने वाले महत्वपूर्ण संकेत दे सकता है।

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Rupa Kumari

Reporter | Samachar Postमैंने सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ झारखंड से पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री ली है। पत्रकारिता के क्षेत्र में बतौर रिपोर्टर मेरा अनुभव फिलहाल एक साल से कम है। सामाचार पोस्ट मीडिया के साथ जुड़कर स्टाफ रिपोर्टर के रूप में काम कर रही हूं।See Profile

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