Samachar Post डेस्क, बिहार : बिहार में रोजगार के अवसर बढ़ाने और लोगों की आय दोगुनी करने के लक्ष्य को हासिल करने के लिए सरकार छोटे उद्योगों को बढ़ावा देने पर फोकस कर सकती है। आगामी वित्त वर्ष के बजट में इसके लिए विशेष फंड का प्रावधान किए जाने की संभावना है। ‘दोगुना रोजगार-दोगुनी आय’ के लक्ष्य को लेकर गठित तीन सदस्यीय कमेटी ने अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी है। कमेटी ने छोटे और सूक्ष्म उद्योगों के विस्तार के साथ रोजगार बढ़ाने, राज्य की आर्थिक विकास दर को मजबूत बनाए रखने और क्षेत्रीय असमानता दूर करने पर जोर दिया है।
पूर्व मुख्य सचिव नवीन कुमार ने सौंपी रिपोर्ट
कमेटी के अध्यक्ष और बिहार के पूर्व मुख्य सचिव नवीन कुमार ने शनिवार को अपनी रिपोर्ट डिप्टी सीएम सह वित्त मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव को सौंपी। अब वित्त विभाग कमेटी की सिफारिशों के आधार पर आगामी बजट में जरूरी प्रावधान कर सकता है। नवीन कुमार के मुताबिक, साल 2015 में सात निश्चय की शुरुआत हुई थी। इसके बाद सात निश्चय-3 में ‘दोगुना रोजगार-दोगुनी आय’ का लक्ष्य निर्धारित किया गया। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए बिहार की आर्थिक विकास दर को करीब 16 फीसदी बनाए रखना जरूरी है। कमेटी के अनुसार, पिछले दो दशकों में बिहार ने तेज आर्थिक विकास दर्ज किया है। इस दौरान राज्य की औसत विकास दर 13.7 फीसदी रही, जबकि 2022-23 में यह बढ़कर 17.9 फीसदी तक पहुंच गई थी। कमेटी ने आगे भी विकास की रफ्तार बनाए रखने की जरूरत बताई है।

बड़े उद्योगों के साथ छोटे उद्योगों पर भी जोर
कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में बड़े उद्योगों के साथ छोटे और सूक्ष्म उद्योगों को बढ़ावा देने की सिफारिश की है। रिपोर्ट के मुताबिक रोजगार और आय बढ़ाने के लिए किसी एक क्षेत्र पर निर्भर रहने के बजाय अर्थव्यवस्था के अलग-अलग क्षेत्रों में एक साथ काम करना जरूरी है। छोटे उद्योगों को बढ़ावा मिलने से स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ सकते हैं और जिलों की आर्थिक गतिविधियों को मजबूती मिल सकती है। इसी वजह से कमेटी ने जिला स्तर पर उद्योगों को बढ़ावा देने और स्थानीय जरूरतों के मुताबिक विकास योजनाएं तैयार करने पर जोर दिया है।
हर जिले की जरूरत के हिसाब से बनेगी विकास योजना
कमेटी ने सुझाव दिया है कि सभी जिलों के लिए एक जैसी योजना लागू करने के बजाय उनकी जरूरत, संसाधन और क्षमता के आधार पर अलग-अलग विकास योजनाएं तैयार की जाएं। इसके साथ ही जिलों की जीडीपी में हिस्सेदारी बढ़ाने और स्थानीय स्तर पर औद्योगिक गतिविधियों को मजबूत करने पर विशेष ध्यान देने की सिफारिश की गई है।
जनवरी 2026 में बनी थी तीन सदस्यीय कमेटी
‘दोगुना रोजगार-दोगुनी आय’ के लक्ष्य को हासिल करने के उपाय सुझाने के लिए तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के कार्यकाल में जनवरी 2026 में तीन सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया था। कमेटी की अध्यक्षता पूर्व मुख्य सचिव नवीन कुमार ने की। इसमें सांख्यिकी मंत्रालय के पूर्व सचिव टीसीए अनंत और आईआईएम अहमदाबाद के प्रोफेसर संकेत महापात्रा शामिल थे। कमेटी को रोजगार और आय बढ़ाने के लिए जरूरी उपायों पर सरकार को सुझाव देने की जिम्मेदारी दी गई थी। डिप्टी सीएम सह वित्त मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने कहा है कि सरकार कमेटी की रिपोर्ट पर अमल करेगी। इसके लिए आगामी बजट में जरूरी राशि का प्रावधान किया जाएगा। सरकार जिलों की स्थिति की निगरानी आंकड़ों के आधार पर करेगी। इसके अलावा कृषि, जल प्रबंधन, बिजली और संचार जैसे क्षेत्रों पर भी फोकस रहेगा। निवेश बढ़ाने के लिए नीतियां तैयार की गई हैं और सरकार को कई बड़ी परियोजनाओं के आने की उम्मीद है।
कमेटी की प्रमुख सिफारिशें
- बड़े उद्योग स्थापित करने की योजनाओं में तेजी लाई जाए।
- छोटे उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए विशेष नीति बनाई जाए।
- प्रत्येक जिले की जरूरत और क्षमता के अनुसार विशिष्ट विकास योजना तैयार हो।
- उद्योग लगाने की प्रक्रिया को आसान बनाया जाए।
- सूक्ष्म उद्योगों की मंजूरी प्रक्रिया जिला और प्रमंडल स्तर पर पूरी करने की व्यवस्था हो।
- जिलों की जीडीपी में हिस्सेदारी बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जाए।
- जीविका समूहों को शासन में भागीदारी देने पर विचार किया जाए।
अब आगामी बजट पर टिकी निगाहें
कमेटी की रिपोर्ट सरकार को सौंपे जाने के बाद अब निगाहें आगामी बिहार बजट पर टिक गई हैं। बजट में सरकार छोटे उद्योगों के लिए कितना फंड उपलब्ध कराती है और कमेटी की सिफारिशों को किस तरह लागू करती है, इसकी तस्वीर बजट पेश होने के बाद साफ होगी। छोटे उद्योगों को बढ़ावा देने के साथ जिला स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ाने की योजनाओं पर तेजी से अमल होता है, तो यह ‘दोगुना रोजगार-दोगुनी आय’ के लक्ष्य की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।





















