Samachar Post डेस्क, रांची : देवघर में प्रस्तावित बाबा बैद्यनाथ मेडिकल कॉलेज को लेकर चल रहे कानूनी विवाद में बाबा बैद्यनाथ मेडिकल ट्रस्ट को अहम राहत मिली है। मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने 15 जुलाई 2026 को राज्य सरकार और परित्राण मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल की ओर से दायर अपीलों को खारिज कर दिया था। वहीं, Essentiality Certificate को लेकर निचली अदालत के आदेश में आंशिक संशोधन करते हुए जमीन सत्यापन और प्रमाणपत्र पर निर्णय के लिए समयसीमा तय की गई थी। गोड्डा सांसद निशिकांत दुबे ने मामले में सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए इसे न्याय की जीत बताया है। हालांकि, उनके इस राजनीतिक दावे को स्वतंत्र तथ्य के रूप में नहीं बल्कि उनके बयान के रूप में देखा जाना चाहिए।
जमीन के म्यूटेशन पर राज्य की अपील खारिज
मामला देवघर में उस जमीन से जुड़ा है, जिसे बाबा बैद्यनाथ मेडिकल ट्रस्ट ने सार्वजनिक नीलामी में खरीदा था। झारखंड हाईकोर्ट ने 15 जुलाई के फैसले में राज्य सरकार और परित्राण मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल की ओर से दायर संबंधित अपीलों को खारिज करते हुए ट्रस्ट के पक्ष में म्यूटेशन से जुड़े आदेश को बरकरार रखा। अदालत के रिकॉर्ड के मुताबिक, परित्राण मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल पर बैंक का बड़ा कर्ज था। ऋण की वसूली के लिए संपत्ति की नीलामी हुई और 20 दिसंबर 2023 की नीलामी में बाबा बैद्यनाथ मेडिकल ट्रस्ट सफल बोलीदाता बना। ट्रस्ट के पक्ष में 23 जनवरी 2024 को बिक्री प्रमाणपत्र जारी किया गया और अगले दिन संपत्ति का कब्जा सौंपा गया।
Essentiality Certificate पर क्या कहा अदालत ने?
मेडिकल कॉलेज शुरू करने के लिए Essentiality Certificate जरूरी है। इस मामले में ट्रस्ट की ओर से प्रमाणपत्र के लिए आवेदन किया गया था, लेकिन लंबे समय तक उस पर निर्णय नहीं लिया गया। नवंबर 2025 में झारखंड हाईकोर्ट के एकल पीठ ने राज्य को प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया था। 15 जुलाई 2026 के फैसले में हाईकोर्ट की खंडपीठ ने कहा कि Essentiality Certificate के आवेदन को अनिश्चित समय तक लंबित नहीं रखा जा सकता। हालांकि, अदालत ने सीधे प्रमाणपत्र जारी करने के बजाय जमीन का सत्यापन चार सप्ताह में पूरा करने और उसके बाद सक्षम प्राधिकारी को छह सप्ताह के भीतर आवेदन पर कानून के अनुसार निर्णय लेने का निर्देश दिया।
मेडिकल कॉलेज खुलने के लिए अभी क्या जरूरी है?
अदालत के आदेश से जमीन और Essentiality Certificate की प्रक्रिया को लेकर ट्रस्ट को कानूनी राहत मिली है, लेकिन इससे मेडिकल कॉलेज का संचालन अपने आप शुरू नहीं हो जाता। मेडिकल कॉलेज स्थापित करने और छात्रों का दाखिला शुरू करने के लिए संबंधित नियामकीय मंजूरियां और निर्धारित प्रक्रियाएं पूरी करनी होंगी। इससे पहले अगस्त 2026 में झारखंड हाईकोर्ट में National Medical Commission से जुड़े मामले में भी Essentiality Certificate को लेकर सुनवाई हुई थी।
निशिकांत दुबे ने क्या कहा?
सुप्रीम कोर्ट में हालिया सुनवाई के बाद निशिकांत दुबे ने सोशल मीडिया पर इसे “न्याय की जीत” बताया और आरोप लगाया कि राज्य सरकार मेडिकल कॉलेज खोलने में बाधा डाल रही थी। यह सांसद का राजनीतिक आरोप है; इसे अदालत के स्वतंत्र निष्कर्ष के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जा सकता।




















