Samachar Post रिपोर्टर, रांची : बड़गाईं अंचल की 8.86 एकड़ जमीन से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की याचिका पर झारखंड हाईकोर्ट में बुधवार को विस्तृत सुनवाई होगी। सुनवाई दोपहर 2:15 बजे निर्धारित है। मंगलवार को मामले में आंशिक सुनवाई हुई थी, जिसके बाद अदालत ने विस्तृत दलीलों के लिए 30 सितंबर की तारीख तय की।
आरोप गठन टालने की मांग को लेकर हाईकोर्ट पहुंचे हेमंत सोरेन
हेमंत सोरेन ने विशेष पीएमएलए अदालत के उस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी है, जिसमें जांच पूरी होने तक उनके खिलाफ आरोप गठन की प्रक्रिया टालने की मांग खारिज कर दी गई थी। उनकी याचिका में कहा गया है कि मामले में जांच जारी रहने के दौरान आरोप गठन की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ाई जानी चाहिए। याचिका में PMLA की धारा 44(1)(d) के तहत मामले की सुनवाई किए जाने का अनुरोध किया गया है। साथ ही धारा 44 के संबंधित प्रावधान की संवैधानिक वैधता को भी चुनौती दी गई है।
18 सितंबर को हाईकोर्ट ने PMLA कोर्ट की कार्यवाही पर रोक से किया था इनकार
इससे पहले 18 सितंबर को हाईकोर्ट ने हेमंत सोरेन की उस मांग को स्वीकार नहीं किया था, जिसमें बड़गाईं जमीन मामले में निचली अदालत की कार्यवाही पर रोक लगाने की मांग की गई थी। इसके बाद विशेष पीएमएलए अदालत में आरोप गठन की प्रक्रिया आगे बढ़ती रही। 24 सितंबर को विशेष पीएमएलए अदालत में हेमंत सोरेन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश हुए थे। उन्होंने ईडी की ओर से उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों के अध्ययन के लिए समय मांगा था। अदालत ने उन्हें छह दिन का समय देते हुए 30 सितंबर को अगली सुनवाई तय की थी।
17 आरोपितों में 16 के खिलाफ आरोप गठित
बड़गाईं जमीन से जुड़े इस मामले में कुल 17 आरोपित हैं। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार 16 आरोपितों के खिलाफ आरोप गठित किए जा चुके हैं, जबकि हेमंत सोरेन के खिलाफ आरोप गठन की प्रक्रिया बाकी है। विशेष अदालत में 30 सितंबर को इस बिंदु पर भी सुनवाई निर्धारित है। प्रवर्तन निदेशालय के अनुसार मामला जमीन के रिकॉर्ड में कथित हेरफेर, फर्जी दस्तावेज और जमीन पर कथित अवैध कब्जे से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग आरोपों से संबंधित है। इन आरोपों पर अंतिम न्यायिक निर्णय होना अभी बाकी है।
एक ही दिन हाईकोर्ट और विशेष अदालत में सुनवाई
बड़गाईं जमीन मामले में 30 सितंबर को झारखंड हाईकोर्ट और विशेष पीएमएलए अदालत, दोनों में सुनवाई निर्धारित है। हाईकोर्ट में हेमंत सोरेन की याचिका और पीएमएलए की धारा 44 से जुड़े कानूनी सवालों पर सुनवाई होगी, जबकि विशेष अदालत में आरोप गठन की प्रक्रिया से जुड़े मामले पर कार्यवाही होगी। हाईकोर्ट की कार्यवाही का असर विशेष अदालत में होने वाली आगे की कार्रवाई पर पड़ सकता है।






















