Samachar Post रिपोर्टर, रांची : झारखंड के सरकारी कर्मचारियों के लिए Modified Assured Career Progression (MACP) को लेकर राहत की खबर है। अब MACP का लाभ लेने के लिए विभागीय परीक्षा पास करने की अनिवार्यता खत्म हो सकती है। झारखंड हाईकोर्ट के आदेश के आलोक में वित्त विभाग ने विभागीय परीक्षा की शर्त हटाने का प्रस्ताव तैयार किया है। प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद राज्यकर्मियों को MACP का वित्तीय लाभ लेने के लिए विभागीय परीक्षा पास करने की बाध्यता नहीं रहेगी।
क्या है MACP का प्रावधान
MACP के तहत सरकारी कर्मचारियों को नियमित प्रमोशन नहीं मिलने की स्थिति में निर्धारित अवधि के बाद उच्चतर पे-लेवल का वित्तीय लाभ दिया जाता है। राज्य में यह लाभ सामान्य तौर पर 10, 20 और 30 वर्ष की सेवा पूरी होने पर अधिकतम तीन बार दिए जाने का प्रावधान है। इसका उद्देश्य लंबे समय तक पदोन्नति नहीं मिलने वाले कर्मचारियों को करियर में वित्तीय उन्नयन देना है।

हाईकोर्ट के आदेश के बाद विभाग ने लिया फैसला
MACP के लाभ को लेकर कर्मचारियों की ओर से लगातार अदालत का रुख किए जाने के बाद मामला हाईकोर्ट पहुंचा। जानकारी के अनुसार, झारखंड हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के आलोक में कहा कि MACP के तहत कर्मचारी को पदोन्नति नहीं, बल्कि उच्चतर वेतनमान का वित्तीय लाभ मिलता है। ऐसे में इसके लिए अतिरिक्त शैक्षणिक योग्यता या विभागीय परीक्षा जैसी शर्तों की अनिवार्यता पर सवाल उठे। इसी आधार पर राज्य सरकार ने विभागीय परीक्षा की बाध्यता समाप्त करने का सैद्धांतिक निर्णय लिया है।
स्वीकृति के बाद कर्मचारियों को मिलेगा लाभ
वित्त विभाग की ओर से तैयार प्रस्ताव को सरकार की मंजूरी मिलना अभी बाकी है। स्वीकृति मिलने के बाद MACP का लाभ लेने वाले राज्य कर्मचारियों और अधिकारियों को विभागीय परीक्षा पास करने की शर्त से राहत मिल जाएगी। इस बदलाव से उन कर्मचारियों को विशेष राहत मिलने की उम्मीद है, जो निर्धारित सेवा अवधि पूरी करने के बावजूद विभागीय परीक्षा की अनिवार्यता के कारण MACP के वित्तीय लाभ से वंचित रह रहे हैं।





















