Samachar Post डेस्क, रांची : बोकारो के तेतुलिया वन भूमि मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अभियोजन शिकायत (Prosecution Report) दाखिल की है। एजेंसी ने मामले में शैलेश सिंह, उनके बेटे आयुष, उनकी कंपनी आयुष मल्टीकॉम, इजहार हुसैन, अख्तर हुसैन, पुनीत अग्रवाल और राजवीर कंस्ट्रक्शन को आरोपित किया है। इसी कार्रवाई के तहत शैलेश सिंह की करीब 2 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्तियां जब्त की गई हैं। इन संपत्तियों का बाजार मूल्य करीब 6 करोड़ रुपये आंका गया है।
103 एकड़ वन भूमि से जुड़ा है मामला
ED की ओर से दाखिल आरोप पत्र के मुताबिक, इजहार हुसैन और अख्तर हुसैन पर फर्जी दस्तावेजों के जरिए बोकारो जिले के तेतुलिया मौजा की 103 एकड़ वन भूमि को अपने नाम कराने और उसकी खरीद-बिक्री करने का आरोप है। जांच एजेंसी का आरोप है कि इजहार हुसैन ने अपने पूर्वजों के नाम पर पुरुलिया स्थित रजिस्ट्री कार्यालय से नीलामी के दौरान जमीन खरीदे जाने से संबंधित कथित फर्जी दस्तावेज तैयार करवाए। इन दस्तावेजों के आधार पर सरकारी अधिकारियों के साथ कथित साजिश के जरिए जमीन अपने नाम कराने का आरोप है। इसके बाद यह जमीन आयुष मल्टीकॉम को बेचे जाने और कंपनी के नाम पर वन भूमि का हस्तांतरण कर आगे बिक्री से लाभ कमाने की बात आरोप पत्र में कही गई है।
आयुष मल्टीकॉम को 4 करोड़ से अधिक भुगतान का दावा
ED के अनुसार, राजवीर कंस्ट्रक्शन के पुनीत अग्रवाल की कंपनी ने वन भूमि खरीदने के लिए आयुष मल्टीकॉम को 4 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया था। जांच एजेंसी के मुताबिक, यह रकम उस समय दी गई जब आयुष मल्टीकॉम ने कथित तौर पर इजहार हुसैन की जमीन खरीदी ही नहीं थी। जांच के दौरान राजवीर कंस्ट्रक्शन के निदेशक ने दावा किया था कि आयुष मल्टीकॉम के साथ जमीन विकसित करने के लिए डेवलपमेंट एग्रीमेंट किया गया था और उसी के तहत भुगतान किया गया। हालांकि, ED ने इस दावे को स्वीकार नहीं किया। एजेंसी का कहना है कि भुगतान के समय आयुष मल्टीकॉम के पास संबंधित जमीन का स्वामित्व ही नहीं था, ऐसे में उस समय डेवलपमेंट एग्रीमेंट किए जाने पर सवाल उठता है।
शैलेश सिंह की संपत्तियां जब्त
ED ने मामले में शैलेश सिंह की करीब 2 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्तियां जब्त की हैं। इनमें पटना स्थित मकान और गांव में मौजूद जमीन शामिल बताई गई है। एजेंसी के अनुसार, इन संपत्तियों का अनुमानित बाजार मूल्य करीब 6 करोड़ रुपये है। मामले में ED की ओर से दाखिल आरोप पत्र में लगाए गए आरोपों पर अंतिम निर्णय अदालत की न्यायिक प्रक्रिया के बाद होगा।




















