लोहरदगा में जर्जर आंगनबाड़ी केंद्र में 21 मासूमों की जान जोखिम में, छत से गिर रहा प्लास्टर

Samachar Post रिपोर्टर,लोहरदगा : भंडरा प्रखंड मुख्यालय के बाजारटांड़ स्थित आंगनबाड़ी केंद्र की जर्जर हालत ने बच्चों और गर्भवती महिलाओं की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। भवन की छत का प्लास्टर लगातार टूटकर गिर रहा है। बारिश के दौरान छत से पानी टपकता है, जिससे केंद्र में बैठना मुश्किल हो जाता है। केंद्र में 21 बच्चों का नामांकन है। जर्जर भवन को लेकर अभिभावक भी बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। आंगनबाड़ी केंद्र में बच्चों को प्रारंभिक शिक्षा के साथ पोषण और अन्य जरूरी सेवाएं दी जाती हैं। लेकिन भवन की हालत ऐसी है कि बच्चों के ऊपर कभी भी प्लास्टर गिर सकता है। बारिश में पानी का रिसाव स्थिति को और खराब कर देता है। अभिभावकों का कहना है कि भवन की छत और दीवारों को देखकर हमेशा हादसे का डर बना रहता है। इसी वजह से कुछ अभिभावक बच्चों को केंद्र भेजने से भी कतराने लगे हैं। जर्जर भवन का असर गर्भवती महिलाओं पर भी पड़ रहा है। केंद्र पर टीकाकरण और स्वास्थ्य संबंधी सेवाओं के लिए आने वाली महिलाओं का कहना है कि बारिश के दौरान यहां बैठना सुरक्षित महसूस नहीं होता। उन्हें अपने साथ-साथ गर्भस्थ शिशु की सुरक्षा की चिंता रहती है।

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सेविका ने अधिकारियों को दी लिखित जानकारी

केंद्र की सेविका सुमित्रा उरांव ने बताया कि भवन की स्थिति लंबे समय से खराब है और लगातार बिगड़ रही है। छत का प्लास्टर टूटकर गिरने से बच्चों की सुरक्षा को लेकर हमेशा डर बना रहता है। बारिश में पानी का रिसाव होने से परेशानी बढ़ जाती है। उन्होंने बताया कि भवन की स्थिति की जानकारी विभाग के वरीय अधिकारियों को लिखित रूप से दी जा चुकी है।

सुरक्षित जगह पर शिफ्ट होगा केंद्र- प्रशासन

मामले की जानकारी मिलने के बाद सीओ सह प्रभारी सीडीपीओ दुर्गा कुमार ने संबंधित पर्यवेक्षिका को तत्काल केंद्र का निरीक्षण करने का निर्देश दिया है। उन्होंने कहा कि बच्चों की सुरक्षा सर्वोपरि है और जर्जर भवन में बच्चों को रखना उचित नहीं है। भवन की स्थिति को देखते हुए आंगनबाड़ी केंद्र को जल्द किसी सुरक्षित किराए के मकान में स्थानांतरित कर संचालित करने की व्यवस्था की जाएगी। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से आंगनबाड़ी केंद्र के लिए स्थायी और सुरक्षित भवन उपलब्ध कराने की मांग की है, ताकि बच्चों, गर्भवती महिलाओं और सेविका को किसी तरह के खतरे का सामना न करना पड़े।

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