पलामू: आंदोलन की चेतावनी के बाद ऑफलाइन छात्रों को सेमेस्टर-1 परीक्षा में शामिल होने की अनुमति

Rupa Kumari | August 17, 2026 | 03:25 PM IST

Samachar Post रिपोर्टर, मेदिनीनगर : नीलांबर-पीतांबर विश्वविद्यालय (एनपीयू) के शैक्षणिक सत्र 2025-29 के ऑफलाइन नामांकन वाले छात्रों को आखिरकार राहत मिल गई है। छात्रों द्वारा आंदोलन और धरना की चेतावनी दिए जाने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने उन्हें सेमेस्टर-1 परीक्षा में शामिल होने की अनुमति दे दी है।

लंबे समय से चल रहा था विवाद

एनपीयू में 2025-29 सत्र के दौरान ऑफलाइन माध्यम से दाखिला लेने वाले छात्रों के नामांकन को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था। इन छात्रों का नामांकन चांसलर पोर्टल पर दर्ज नहीं होने के कारण उनकी शैक्षणिक प्रक्रिया प्रभावित हो रही थी। मामले को लेकर राज्य के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने भी राज्यपाल से शिकायत की थी और ऑफलाइन नामांकन वाले छात्रों के लिए चांसलर पोर्टल खोलने का अनुरोध किया था। इसके बाद कुल 1,628 छात्रों के लिए पोर्टल खोला गया और नामांकन संबंधी प्रक्रिया पूरी की गई।

परीक्षा को लेकर बढ़ी थी नाराजगी

चांसलर पोर्टल पर नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद विश्वविद्यालय प्रशासन ने पहले इन छात्रों की सेमेस्टर-1 परीक्षा आयोजित करने से इनकार कर दिया था। दूसरी ओर, इसी सत्र के ऑनलाइन नामांकन वाले छात्रों के सेमेस्टर-2 की परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी गई थी। इससे प्रभावित छात्रों में नाराजगी बढ़ गई। छात्रों ने राज्यपाल और राज्य सरकार को ज्ञापन सौंपकर परीक्षा आयोजित कराने की मांग की। साथ ही 18 अगस्त को धरना प्रदर्शन करने की घोषणा भी कर दी। छात्रों के आंदोलन की चेतावनी के बाद कुलपति दिनेश कुमार सिंह ने ऑफलाइन नामांकन वाले छात्रों को सेमेस्टर-1 परीक्षा में शामिल होने की अनुमति दे दी। विश्वविद्यालय प्रशासन ने परीक्षा फॉर्म भरने के लिए पोर्टल भी खोल दिया है।

15 से 21 अगस्त तक भर सकेंगे फॉर्म

विश्वविद्यालय के अनुसार:

  • फॉर्म भरने की अवधि: 15 अगस्त से 21 अगस्त 2026
  • लाभान्वित छात्र: 1,628
  • संबद्ध कॉलेज: 16
  • परीक्षा संभावित तिथि: सितंबर 2026

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छात्रों ने राहत की सांस ली

विश्वविद्यालय के फैसले के बाद प्रभावित छात्रों ने राहत की सांस ली है। लंबे समय से परीक्षा को लेकर बनी अनिश्चितता समाप्त होने से अब वे आगामी सेमेस्टर-1 परीक्षा की तैयारी पर ध्यान केंद्रित कर सकेंगे। यह मामला हाल के दिनों में एनपीयू के सबसे चर्चित शैक्षणिक विवादों में शामिल रहा, जिसमें छात्रों, जनप्रतिनिधियों और विश्वविद्यालय प्रशासन के बीच लगातार खींचतान देखने को मिली।

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