JSSC की CID जांच पर बाबूलाल मरांडी का हमला, बोले- ‘सुधीर गुप्ता से पूछताछ खानापूर्ति’

Meenu | August 17, 2026 | 04:57 PM IST

Samachar Post रिपोर्टर,रांची : JSSC-CGL परीक्षा को लेकर चल रही जांच के बीच CID ने सोमवार को JSSC कार्यालय में छापेमारी की और आयोग के सचिव सुधीर गुप्ता से पूछताछ की। इस कार्रवाई पर नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने सवाल उठाते हुए इसे महज दिखावा और ‘आईवॉश’ करार दिया है। बाबूलाल मरांडी ने आरोप लगाया कि सचिव से पूछताछ करके सिर्फ खानापूर्ति की जा रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि 22 फरवरी 2024 से JSSC चेयरमैन के पद पर कार्यरत प्रशांत कुमार से जांच एजेंसी पूछताछ क्यों नहीं कर रही है।

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‘प्रशांत कुमार पर जांच एजेंसी इतनी मेहरबान क्यों?’

बाबूलाल मरांडी ने कहा कि JSSC की जांच में आयोग के शीर्ष पद पर बैठे अधिकारियों की भूमिका भी गंभीरता से देखी जानी चाहिए। उन्होंने सवाल किया कि प्रशांत कुमार से पूछताछ क्यों नहीं हो रही और उनकी गिरफ्तारी की चर्चा तक क्यों नहीं होती। उन्होंने आरोप लगाया कि सिस्टम में कथित तौर पर विवादों में रहे प्रशांत कुमार को जांच के दायरे से बाहर रखा जा रहा है। मरांडी ने सवाल किया कि आखिर ऐसी क्या वजह है कि जांच एजेंसी उन पर कार्रवाई नहीं कर रही है।

‘कौन लोग प्रशांत कुमार को बचा रहे हैं?’

नेता प्रतिपक्ष ने CID के शीर्ष अधिकारी मनोज कौशिक से भी सवाल किया। उन्होंने कहा कि यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि JSSC चेयरमैन प्रशांत कुमार के मामले में जांच एजेंसी ने इतनी नरमी क्यों दिखाई है। मरांडी ने सवाल उठाया कि आखिर वे कौन लोग हैं, जो जांच एजेंसी को प्रशांत कुमार के खिलाफ कार्रवाई करने से रोक रहे हैं। उन्होंने यह भी पूछा कि कहीं एक कथित रूप से दागी व्यक्ति को दूसरे कथित रूप से दागी व्यक्ति द्वारा बचाने की रणनीति तो नहीं अपनाई जा रही है।

एल. ख्यांगते का उदाहरण देकर सरकार पर निशाना

बाबूलाल मरांडी ने एल. ख्यांगते के मामले का उदाहरण देते हुए कहा कि भ्रष्ट तंत्र में अक्सर बड़े अधिकारियों को बचाने की कोशिश की जाती है। उन्होंने आरोप लगाया कि झारखंड में भी इसी तरह की स्थिति देखने को मिल रही है। उन्होंने कहा कि जांच में केवल छोटे स्तर के लोगों को निशाना बनाने के बजाय पूरे मामले के जिम्मेदार लोगों और कथित सरगनाओं तक पहुंचना चाहिए।

‘सरगनाओं पर कार्रवाई से ही छात्रों का भरोसा लौटेगा’

मरांडी ने कहा कि JSSC-CGL से जुड़े मामलों की निष्पक्ष जांच जरूरी है। उनके मुताबिक, केवल कुछ अधिकारियों या कर्मचारियों पर कार्रवाई करने से छात्रों का भरोसा बहाल नहीं होगा। उन्होंने कहा कि यदि जांच एजेंसी वास्तव में निष्पक्ष तरीके से कार्रवाई करती है और मामले में जिम्मेदार शीर्ष अधिकारियों की भूमिका की जांच होती है, तभी आंदोलन कर रहे छात्रों के बीच विश्वास कायम करने का रास्ता खुलेगा।

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