जमशेदपुर: 39वें शहादत दिवस पर शहीद निर्मल महतो को दी गई श्रद्धांजलि, उलियान में उमड़ा जनसैलाब

Meenu | August 8, 2026 | 03:58 PM IST

Samachar Post रिपोर्टर,जमशेदपुर : झारखंड आंदोलन के महानायक शहीद निर्मल महतो का 39वां शहादत दिवस शनिवार को पूरे राज्य में श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाया गया। इस अवसर पर जमशेदपुर के कदमा स्थित उलियान में उनके समाधि स्थल और प्रतिमा पर श्रद्धांजलि देने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। 8 अगस्त 1987 को जमशेदपुर के बिष्टुपुर स्थित चमरिया गेस्ट हाउस के बाहर निर्मल महतो की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। उस समय उनकी उम्र महज 36 वर्ष थी। अलग झारखंड राज्य के आंदोलन में उनके योगदान और बलिदान को आज भी याद किया जाता है। उनकी शहादत के बाद झारखंड आंदोलन को नई दिशा और गति मिली और वर्ष 2000 में अलग झारखंड राज्य का गठन हुआ।

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उलियान में सुबह से जुटते रहे लोग

कदमा के उलियान स्थित शहीद निर्मल महतो के समाधि स्थल और प्रतिमा पर सुबह से ही श्रद्धांजलि देने वालों का तांता लगा रहा। झारखंड मुक्ति मोर्चा समेत विभिन्न राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों, छात्र संगठनों और आम नागरिकों ने वहां पहुंचकर पुष्प अर्पित किए और शहीद को नमन किया। इस दौरान नेताओं और कार्यकर्ताओं ने निर्मल महतो के योगदान को याद किया। कई श्रद्धालु भावुक नजर आए और उनकी प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धा व्यक्त की।

झारखंड की अस्मिता और स्वाभिमान के प्रतीक थे निर्मल महतो

श्रद्धांजलि सभा में वक्ताओं ने कहा कि निर्मल महतो केवल एक राजनीतिक नेता नहीं, बल्कि झारखंड की अस्मिता, स्वाभिमान और न्याय के प्रतीक थे। उन्होंने शोषण और अन्याय के खिलाफ आवाज उठाई और अलग झारखंड राज्य के निर्माण के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया। वक्ताओं ने कहा कि निर्मल महतो का संघर्ष और बलिदान झारखंड की राजनीतिक और सामाजिक चेतना का महत्वपूर्ण हिस्सा है। श्रद्धांजलि सभा के दौरान युवाओं से उनके आदर्शों और संघर्ष की भावना को अपनाते हुए झारखंड के विकास में योगदान देने का आह्वान किया गया। 39वें शहादत दिवस पर आयोजित कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों ने शहीद निर्मल महतो के सपनों और उनके संघर्ष को याद करते हुए उनके बताए रास्ते पर चलने का संकल्प लिया।

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