Samachar Post रिपोर्टर,हजारीबाग : महिला सशक्तिकरण और मातृत्व अधिकारों की बात करने वाले सरकारी तंत्र पर हजारीबाग में सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि जिला शिक्षा अधीक्षक (DSE) कार्यालय पिछले करीब एक वर्ष से जरूरतमंद महिला शिक्षिकाओं को चाइल्ड केयर लीव (CCL) देने से इनकार कर रहा है। स्थिति यह है कि कई शिक्षिकाओं ने छुट्टी के लिए आवेदन देना भी बंद कर दिया है, क्योंकि उनका कहना है कि आवेदन बिना ठोस कारण के खारिज कर दिए जाते हैं।
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शिक्षिकाओं ने लगाया अधिकार से वंचित करने का आरोप
जानकारी के अनुसार, विभाग कथित रूप से पहले हुए कुछ मामलों में अवकाश के दुरुपयोग का हवाला देकर पूरे जिले की महिला शिक्षिकाओं के चाइल्ड केयर लीव आवेदन अस्वीकार कर रहा है। पीड़ित शिक्षिकाओं का कहना है कि यदि कुछ मामलों में नियमों का उल्लंघन हुआ था तो संबंधित लोगों पर कार्रवाई होनी चाहिए थी, लेकिन उसकी सजा पूरे जिले की शिक्षिकाओं को नहीं दी जानी चाहिए। नाम प्रकाशित नहीं करने की शर्त पर कई शिक्षिकाओं ने बताया कि बच्चों की देखभाल के लिए दिए गए उनके आवेदन बिना किसी स्पष्ट कारण के खारिज कर दिए जाते हैं।

सेवा नियमों में 720 दिनों के अवकाश का प्रावधान
सेवा नियमों के अनुसार, 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों की देखभाल के लिए महिला शिक्षिकाओं को पूरे सेवाकाल में 720 दिनों तक सवैतनिक चाइल्ड केयर लीव का प्रावधान है। नियम यह भी कहते हैं कि एक बार में न्यूनतम 15 दिनों का अवकाश स्वीकृत किया जा सकता है। इसके बावजूद हजारीबाग में इस सुविधा का लाभ नहीं मिलने से कई शिक्षिकाएं छोटे बच्चों की देखभाल और नौकरी की जिम्मेदारियों के बीच मानसिक तनाव झेलने को मजबूर हैं।
शिक्षक संघ ने जताई नाराजगी
झारखंड प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष मो. अतिकुज्जा ने इस मामले पर नाराजगी जताते हुए कहा कि समाज में महिलाओं को सम्मान देने की बात तो की जाती है, लेकिन जब उनके कानूनी और संवैधानिक अधिकारों की बात आती है तो उन्हें मानसिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि मातृत्व सम्मान का दावा तभी सार्थक होगा, जब जरूरतमंद शिक्षिकाओं को बिना भेदभाव उनके अधिकार के अनुसार चाइल्ड केयर लीव मिले। अब निगाहें इस बात पर हैं कि क्या जिला शिक्षा अधीक्षक कार्यालय इस मामले पर पुनर्विचार करेगा और जरूरतमंद शिक्षिकाओं को उनका वैधानिक अधिकार उपलब्ध कराएगा।

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