Samachar Post रिपोर्टर,हजारीबाग : शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल परिसर स्थित डायलिसिस सेंटर में पिछले लगभग तीन वर्षों से नेफ्रोलॉजिस्ट (किडनी रोग विशेषज्ञ) की नियुक्ति नहीं होने से मरीजों और उनके परिजनों की चिंता बढ़ गई है। हर महीने करीब 900 से 950 मरीज यहां डायलिसिस के लिए पहुंचते हैं, लेकिन विशेषज्ञ चिकित्सक की अनुपस्थिति को लेकर स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।
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PPP मॉडल पर संचालित हो रहा केंद्र
यह डायलिसिस सेंटर वर्ष 2017 में पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल के तहत शुरू किया गया था। केंद्र के संचालन की जिम्मेदारी एक निजी एजेंसी को दी गई है। शुरुआत में यहां विशेषज्ञ डॉक्टर की तैनाती थी, लेकिन 2024 में डॉक्टर के इस्तीफे के बाद से अब तक नए नेफ्रोलॉजिस्ट की नियुक्ति नहीं हो सकी है। वर्तमान में डायलिसिस की प्रक्रिया तकनीशियनों और अन्य स्टाफ की मदद से संचालित की जा रही है।

हर महीने 950 मरीज, लेकिन विशेषज्ञ नहीं
डायलिसिस सेंटर में हर महीने लगभग 900 से 950 मरीजों का इलाज किया जाता है। मरीजों का कहना है कि डॉक्टर की अनुपस्थिति में उन्हें केवल नियमित डायलिसिस की सुविधा मिल पाती है, जबकि दवाओं में बदलाव, जटिल चिकित्सकीय निर्णय और विशेषज्ञ परामर्श के लिए दूसरे अस्पतालों का सहारा लेना पड़ता है। किडनी रोगियों के लिए नियमित डायलिसिस जीवनरक्षक प्रक्रिया होती है। ऐसे में इलाज के दौरान यदि किसी मरीज की स्थिति अचानक गंभीर हो जाए तो विशेषज्ञ डॉक्टर की मौजूदगी बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।
स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठ रहे सवाल
मरीजों और उनके परिजनों का कहना है कि वे कई बार विशेषज्ञ डॉक्टर की नियुक्ति की मांग कर चुके हैं, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकला है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का भी मानना है कि डायलिसिस केवल मशीन संचालित करने की प्रक्रिया नहीं, बल्कि गंभीर चिकित्सा सेवा है, जिसमें विशेषज्ञ चिकित्सक की निगरानी आवश्यक होती है। स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने स्वास्थ्य विभाग से जल्द से जल्द नेफ्रोलॉजिस्ट की नियुक्ति सुनिश्चित करने की मांग की है, ताकि मरीजों को बेहतर और सुरक्षित इलाज मिल सके।

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