Samachar Post रिपोर्टर, जामताड़ा : झारखंड के जामताड़ा जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने सामाजिक मान्यताओं और वैवाहिक रिश्तों को लेकर नई चर्चा छेड़ दी है। जिस उम्र में अधिकांश लोग परिवार, बच्चों और नाती-पोतों के साथ जीवन का शांत समय बिताते हैं, उसी उम्र में 60 वर्ष से अधिक आयु के एक बुजुर्ग दंपति ने आपसी सहमति से अपने वैवाहिक संबंध को समाप्त कर दिया। कर्माटांड़ थाना क्षेत्र के रहने वाले अर्जुन और सोना ने जामताड़ा व्यवहार न्यायालय में विवाह विच्छेद की याचिका दायर की थी। कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद अदालत ने दोनों को तलाक की अनुमति दे दी।
वर्षों पुराने मतभेद बने अलगाव की वजह
जानकारी के अनुसार, दोनों के बच्चे बड़े हो चुके हैं और परिवार में नाती-पोते भी हैं। इसके बावजूद लंबे समय से चले आ रहे आपसी मतभेद और पारिवारिक तनाव के कारण रिश्ते में दूरी बढ़ती गई। बताया जाता है कि दोनों कई वर्षों से अलग-अलग रह रहे थे और साथ रहने की संभावनाएं लगभग समाप्त हो चुकी थीं।
हिंदू मैरिज एक्ट की धारा 13-B के तहत दाखिल की थी याचिका
दंपति ने आपसी सहमति से तलाक के लिए हिंदू मैरिज एक्ट की धारा 13-B के तहत फैमिली कोर्ट में आवेदन दिया था। मामले की सुनवाई के दौरान फैमिली कोर्ट ने दोनों पक्षों के बीच समझौते की संभावना तलाशने का प्रयास किया। अदालत की ओर से परामर्श और मध्यस्थता (मेडिएशन) के जरिए संबंध बचाने की कोशिश भी की गई, लेकिन दोनों पक्ष अपने निर्णय पर कायम रहे। इसके बाद न्यायालय ने कानूनी प्रक्रिया पूरी कर विवाह विच्छेद की अनुमति प्रदान कर दी।

पति-पत्नी ने रखे अपने-अपने पक्ष
अदालती प्रक्रिया के दौरान पति अर्जुन ने कहा कि उनकी पत्नी लंबे समय से मायके में रह रही हैं और कई बार आग्रह करने के बावजूद उनके साथ रहने को तैयार नहीं हुईं। वहीं पत्नी सोना का आरोप था कि पति के साथ लगातार विवाद होते थे और वे कोई नियमित कामकाज नहीं करते थे। इसी वजह से उन्होंने अलग रहना बेहतर समझा।
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अदालत परिसर में भावुक माहौल
फैसला सुनाए जाने के बाद दोनों पक्ष शांतिपूर्वक अदालत से बाहर निकले। बताया जाता है कि किसी प्रकार के विवाद या बहस के बिना दोनों अपने-अपने रास्ते चले गए। यह मामला केवल एक तलाक की घटना नहीं, बल्कि समाज में बदलते पारिवारिक और वैवाहिक संबंधों की तस्वीर भी प्रस्तुत करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि आज लोग उम्र के किसी भी पड़ाव पर अपने जीवन और मानसिक शांति से जुड़े फैसले लेने के लिए पहले की तुलना में अधिक स्वतंत्र महसूस कर रहे हैं। हालांकि, ऐसे मामले यह सवाल भी खड़े करते हैं कि लंबे वैवाहिक जीवन के बाद रिश्तों में आई दूरी को समय रहते संवाद और समझदारी से किस हद तक सुलझाया जा सकता है।

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मैंने सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ झारखंड से पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री ली है। पत्रकारिता के क्षेत्र में बतौर रिपोर्टर मेरा अनुभव फिलहाल एक साल से कम है। सामाचार पोस्ट मीडिया के साथ जुड़कर स्टाफ रिपोर्टर के रूप में काम कर रही हूं।

