जामताड़ा में बारिश से धान रोपनी ने पकड़ी रफ्तार, कृषि पदाधिकारी किसानों संग उतरे खेत में

Rupa Kumari | July 7, 2026 | 03:22 PM IST

Samachar Post रिपोर्टर, जामताड़ा : जिले में पिछले दो दिनों से हो रही रुक-रुक कर बारिश ने किसानों के चेहरे पर खुशी लौटा दी है। पर्याप्त वर्षा होने के बाद खेतों में धान रोपनी का काम तेज हो गया है। खरीफ सीजन में निर्धारित लक्ष्य को पूरा करने के लिए किसान और कृषि विभाग दोनों सक्रिय नजर आ रहे हैं। इसी बीच मंगलवार को सोनवाद गांव में एक अलग ही तस्वीर देखने को मिली, जब जिला कृषि पदाधिकारी और कृषि विभाग के अधिकारी किसानों के साथ खेत में उतरकर धान रोपनी करते नजर आए।

किसानों के साथ खेत में उतरे कृषि अधिकारी

क्षेत्र भ्रमण के दौरान जिला कृषि पदाधिकारी लव कुमार और प्रखंड तकनीकी प्रबंधक (BTM) इकबाल हुसैन ने किसानों को खेतों में धान रोपनी करते देखा। इसके बाद दोनों अधिकारी स्वयं खेत में उतर गए और किसानों के साथ मिलकर रोपनी कार्य में हाथ बंटाया। अधिकारियों को अपने बीच खेत में काम करते देख किसानों और ग्रामीणों में उत्साह देखने को मिला। किसानों ने इसे कृषि विभाग की सकारात्मक पहल बताया।

आधुनिक खेती की तकनीकों की दी जानकारी

खेत में काम करने के दौरान अधिकारियों ने किसानों से सीधा संवाद किया और उन्हें आधुनिक कृषि तकनीकों की जानकारी दी। उन्होंने बिचड़ा उखाड़ने की सुरक्षित विधि, पौधों के उपचार और फसल को रोगों से बचाने के उपायों के बारे में विस्तार से बताया। अधिकारियों ने किसानों को सलाह दी कि रोपनी से पहले बिचड़े का उचित उपचार करें, ताकि फसल स्वस्थ रहे और उत्पादन में वृद्धि हो सके।

52 हजार हेक्टेयर में धान रोपनी का लक्ष्य

जिला कृषि पदाधिकारी लव कुमार ने बताया कि खरीफ सीजन 2026 में जामताड़ा जिले में 52 हजार हेक्टेयर भूमि पर धान की खेती का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। उन्होंने कहा कि हाल की बारिश किसानों के लिए राहत लेकर आई है और यदि मौसम अनुकूल बना रहा तो निर्धारित लक्ष्य समय पर हासिल कर लिया जाएगा।

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10 प्रतिशत रोपनी का काम पूरा

कृषि विभाग के अनुसार, जिले में अब तक लगभग 10 प्रतिशत क्षेत्र में धान रोपनी का कार्य पूरा हो चुका है। आने वाले दिनों में बारिश जारी रहने पर रोपनी की रफ्तार और बढ़ने की उम्मीद है। कृषि विभाग लगातार किसानों के संपर्क में रहकर उन्हें तकनीकी सलाह और आवश्यक सहायता उपलब्ध करा रहा है, ताकि इस खरीफ सीजन में बेहतर उत्पादन सुनिश्चित किया जा सके।

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