Samachar Post रिपोर्टर, रांची: रांची सहित झारखंड के कई जिलों में अवैध वेतन निकासी और सरकारी राशि के गबन मामले में जांच तेज हो गई है। की सीआईडी विशेष जांच टीम (SIT) अब तकनीकी साक्ष्य, बैंक ट्रांजैक्शन और दस्तावेजों की गहराई से पड़ताल कर रही है। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे चौंकाने वाले खुलासे सामने आ रहे हैं।
ऑडिट में क्लीन चिट, महिला सदस्य ने खोला राज
जानकारी के अनुसार फरवरी में महालेखाकार कार्यालय की ऑडिट टीम बोकारो पहुंची थी। टीम में शामिल एक महिला सदस्य ने वित्तीय गड़बड़ी पकड़ ली थी, लेकिन इसके बावजूद टीम ने एसपी कार्यालय को क्लीन चिट दे दी। बाद में रांची लौटने पर महिला अधिकारी ने अपने वरिष्ठ को इसकी जानकारी दी, जिसके बाद पूरे मामले का खुलासा हुआ और अन्य जिलों में भी जांच शुरू हो गई।
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चाईबासा केस सीआईडी ने लिया अपने हाथ
चाईबासा के मुफस्सिल थाना में दर्ज केस (कांड संख्या 69/2026) को अब CID ने टेकओवर कर लिया है। इसे CID थाना रांची में कांड संख्या 07/2026 के तहत दोबारा दर्ज किया गया है। इससे पहले बोकारो और हजारीबाग के मामलों को भी CID अपने हाथ में ले चुकी है।
26.21 लाख रुपये का अवैध लेन-देन
कोषागार पदाधिकारी सुमित कुमार के बयान के आधार पर दर्ज केस में सामने आया है कि एसपी चाईबासा कार्यालय के डीडीओ कोड के जरिए मल्टीपल पेयी बनाकर अवैध निकासी की गई। जांच में पिछले कुछ वर्षों में 26 लाख 21 हजार 717 रुपये के गबन का खुलासा हुआ है।
आरोपी सिपाही की भूमिका उजागर
जांच में प्रथम दृष्टया एसपी पश्चिमी सिंहभूम कार्यालय की लेखा शाखा में पदस्थापित सिपाही देवनारायण मुर्मू की संलिप्तता सामने आई है। आरोप है कि उसने कंप्यूटर डेटा में हेराफेरी कर सरकारी दस्तावेजों से छेड़छाड़ की और साजिश के तहत राशि की अवैध निकासी करवाई।
चार खातों में ट्रांसफर की गई राशि
जांच में खुलासा हुआ कि अवैध निकासी की गई रकम चार बैंक खातों में भेजी गई एसबीआई पोटका (पूर्वी सिंहभूम), एसबीआई टैगोर हिल, मोरहाबादी (रांची), एसबीआई चाईबासा, एसबीआई बहालाडा, मयूरभंज (ओडिशा) इन खातों में कुल 26.21 लाख रुपये का लेन-देन पाया गया है।
सॉफ्ट और हार्ड कॉपी में अंतर
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि बिल और वाउचर की सॉफ्ट कॉपी और हार्ड कॉपी में अंतर था। यानी डिजिटल रिकॉर्ड में बदलाव कर गड़बड़ी छिपाने की कोशिश की गई। CID की SIT अब पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है। आशंका जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में अन्य जिलों में भी ऐसे मामलों का खुलासा हो सकता है और इसमें शामिल अन्य अधिकारियों-कर्मचारियों पर भी कार्रवाई हो सकती है।
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मैंने सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ झारखंड से पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री ली है। पत्रकारिता के क्षेत्र में बतौर रिपोर्टर मेरा अनुभव फिलहाल एक साल से कम है। सामाचार पोस्ट मीडिया के साथ जुड़कर स्टाफ रिपोर्टर के रूप में काम कर रही हूं।