मानसून सत्र : कोचिंग संस्थानों पर लगेगी लगाम, विधानसभा से विधेयक पास

Rupa Kumari | August 26, 2025 | 06:13 PM IST

Samachar Post डेस्क, रांची : छात्रों की बढ़ती आत्महत्याओं, आग की घटनाओं, मूलभूत सुविधाओं की कमी और अनियमित कोचिंग सेंटरों के कारण राज्य सरकार ने झारखंड कोचिंग सेंटर (कंट्रोल एंड रेगुलेशन) बिल 2025 को विधानसभा से पारित कराया। उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने सदन में विधेयक पेश किया। भाजपा विधायक नवीन जायसवाल ने इसे प्रवर समिति को भेजने का प्रस्ताव दिया, जिसे ध्वनि मत से खारिज कर दिया गया।

विधेयक पर अब राज्यपाल की स्वीकृति मिलने के बाद यह कानून बन जाएगा, जिससे राज्य के लगभग पांच लाख से अधिक छात्रों को लाभ मिलेगा।

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कोचिंग सेंटरों के लिए मुख्य प्रावधान

विधेयक के तहत ऐसे सेंटर शामिल होंगे जहां 50 से अधिक छात्र किसी भी अध्ययन कार्यक्रम या प्रतियोगिता परीक्षा के लिए पढ़ाई करते हैं।केंद्र स्थापित करने के लिए एक व्यक्ति, समूह, निगम, ट्रस्ट, सोसाइटी या एलएलपी/कंपनी पंजीकृत होना अनिवार्य है। जिला स्तर पर डिस्ट्रिक्ट कोचिंग सेंटर रेगुलेटरी कमेटी और राज्य स्तर पर झारखंड स्टेट कोचिंग सेंटर रेगुलेटरी अथॉरिटी का गठन किया जाएगा। जिला और ब्लॉक स्तर पर शिकायत निवारण प्रकोष्ठ और छात्रावासों में नियमित पुलिस गश्त सुनिश्चित की जाएगी।

कोचिंग सेंटरों के लिए आवेदन और पंजीकरण

कानून लागू होने की 6 महीने के भीतर सभी कोचिंग संस्थानों को जिला कमेटी के पास आवेदन करना होगा। आवेदन में आधारभूत संरचना, पाठ्यक्रम, मूल्यांकन, शुल्क, छात्रावास नीति, ट्यूटर की योग्यता आदि विवरण देना अनिवार्य होगा। 5 लाख रुपये की बैंक गारंटी जमा करने के बाद कमेटी द्वारा लेटर टू स्टार्ट जारी किया जाएगा। पंजीकरण 5 वर्ष के लिए मान्य होगा और नवीनीकरण की प्रक्रिया होगी। कोचिंग संस्थान को वेब पोर्टल पर सभी डेटा उपलब्ध कराना होगा।

शिकायतों का निवारण और दंड

छात्र, अभिभावक या ट्यूटर द्वारा शिकायत डिस्ट्रिक्ट कमेटी के पास दर्ज कराई जा सकेगी। उप-जांच समितियों के माध्यम से 45 दिनों में निवारण किया जाएगा। गंभीर चूक पर पंजीकरण रद्द किया जा सकेगा। नियम उल्लंघन पर पहली बार 5 लाख रुपये, दूसरी बार 10 लाख रुपये का दंड लगाया जाएगा। वित्तीय अनियमितता या कुप्रशासन की स्थिति में संस्थान 5 वर्षों के लिए ब्लैकलिस्टेड किया जा सकेगा।

झारखंड राज्य कोचिंग सेंटर नियामक प्राधिकरण

विवादों के समाधान के लिए राज्य स्तरीय प्राधिकरण का गठन होगा। अध्यक्ष सेवानिवृत्त न्यायिक पदाधिकारी होंगे, उपाध्यक्ष और सदस्य राज्य सरकार के सेवानिवृत्त अधिकारी होंगे। प्राधिकरण की भूमिका होगी शिकायत निवारण और कोचिंग संस्थानों की निगरानी।

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