Samachar Post रिपोर्टर,गिरिडीह : झारखंड के दिवंगत मंत्री और गिरिडीह सदर विधायक सुदिव्य कुमार सोनू का रविवार को हरसिंहरायडीह श्मशान घाट पर अंतिम संस्कार किया गया। उनके 10 वर्षीय पुत्र श्रेयस कुमार ने मुखाग्नि दी। अंतिम संस्कार से पहले जवानों ने उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया। सुदिव्य सोनू के अंतिम दर्शन और अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए।
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मुख्यमंत्री समेत दिग्गज नेताओं ने दिया कंधा
सुदिव्य कुमार सोनू की अंतिम यात्रा में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन समेत झारखंड के कई प्रमुख नेता, अधिकारी और आम लोग शामिल हुए। मुख्यमंत्री समेत कई लोगों ने उनकी अर्थी को कंधा दिया। इससे पहले सीएम हेमंत सोरेन ने शोक संतप्त परिजनों से मुलाकात कर अपनी गहरी संवेदना व्यक्त की। मुख्यमंत्री ने कहा कि सुदिव्य सोनू का आकस्मिक निधन बेहद पीड़ादायक है और यह झारखंड के लिए अपूरणीय क्षति है। उन्होंने कहा कि उनके निधन से राज्य ने एक कर्मठ जनप्रतिनिधि, समर्पित मंत्री और युवा नेतृत्व को खो दिया है। सुदिव्य सोनू के योगदान और जनसेवा को हमेशा याद किया जाएगा। सीएम ने दिवंगत आत्मा की शांति और शोकाकुल परिवार को इस कठिन समय में धैर्य एवं संबल प्रदान करने की प्रार्थना की। विधायक कल्पना सोरेन ने भी सुदिव्य कुमार सोनू के पार्थिव शरीर पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।
37 साल पहले JMM से शुरू हुआ था राजनीतिक सफर
सुदिव्य कुमार सोनू का राजनीतिक सफर करीब 37 वर्ष पहले झारखंड मुक्ति मोर्चा के प्राथमिक सदस्य के रूप में शुरू हुआ था। पार्टी से जुड़ने के बाद उन्होंने संगठन में लगातार काम किया और गिरिडीह नगर इकाई की जिम्मेदारी भी संभाली। उन्होंने विधानसभा चुनाव भी लड़ा, लेकिन शुरुआती प्रयासों में उन्हें लगातार दो बार हार का सामना करना पड़ा। इसके बावजूद उन्होंने राजनीतिक संघर्ष जारी रखा। वर्ष 2019 में पहली बार गिरिडीह से विधायक चुने गए। इसके बाद 2024 में लगातार दूसरी बार चुनाव जीतकर हेमंत सोरेन सरकार में कैबिनेट मंत्री बने।

हेमंत सोरेन के करीबी नेताओं में थे सुदिव्य सोनू
सुदिव्य कुमार सोनू मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के करीबी नेताओं में गिने जाते थे। उनके निधन को हेमंत सोरेन के लिए व्यक्तिगत और राजनीतिक तौर पर भी बड़ी क्षति के रूप में देखा जा रहा है। सुदिव्य सोनू उन नेताओं की कड़ी में शामिल थे, जिनकी जनता के बीच सीधी पहुंच और प्रभाव था और जिनका अब निधन हो चुका है। इस क्रम में हाजी हुसैन अंसारी, जगरनाथ महतो, राजेंद्र सिंह और रामदास सोरेन जैसे नेताओं का भी उल्लेख किया जाता है। सुदिव्य कुमार सोनू के निधन के साथ झारखंड की राजनीति ने एक ऐसे युवा और सक्रिय नेता को खो दिया, जिसने संगठन से अपनी राजनीतिक यात्रा शुरू कर विधायक और फिर राज्य सरकार में कैबिनेट मंत्री तक का सफर तय किया।

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