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तुरामडीह माइंस गेट पर विस्थापितों का धरना, अर्जुन मुंडा के पहुंचने पर विरोध; पुलिस ने संभाली स्थिति

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Samachar Post रिपोर्टर, पूर्वी सिंहभूम : तुरामडीह क्षेत्र के विस्थापित परिवारों के अधिकार, सम्मान और पुनर्वास की मांग को लेकर मंगलवार को सुंदरनगर स्थित तुरामडीह माइंस गेट पर आयोजित धरना-प्रदर्शन के दौरान राजनीतिक माहौल गरमा गया। आंदोलन को समर्थन देने पहुंचे पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा के विरोध में कुछ ग्रामीण संगठनों और स्थानीय लोगों ने प्रदर्शन किया, जिसके बाद कुछ समय के लिए तनावपूर्ण स्थिति उत्पन्न हो गई। हालांकि पुलिस की सक्रिय मौजूदगी से हालात नियंत्रण में रहे। तुरामडीह विस्थापित समिति के बैनर तले आयोजित धरना में शामिल होकर अर्जुन मुंडा ने विस्थापित परिवारों की मांगों का समर्थन किया। उनके साथ भाजपा के कई नेता और कार्यकर्ता भी मौजूद थे। धरना के दौरान विस्थापितों की समस्याओं, रोजगार और पुनर्वास के मुद्दों को प्रमुखता से उठाया गया।

ग्रामसभा के बैनर तले हुआ विरोध प्रदर्शन

धरना स्थल से कुछ दूरी पर संयुक्त ग्रामसभा और नांदूप ग्रामसभा के बैनर तले ग्रामीणों ने विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने अर्जुन मुंडा के खिलाफ नारेबाजी की और उनका पुतला भी फूंका। विरोध में शामिल लोगों का आरोप था कि पूर्व में हुई त्रिपक्षीय वार्ता के आधार पर ग्रामसभाओं के सत्यापन की प्रक्रिया तय की गई थी, जिसे कुछ लोग विवादित बनाने का प्रयास कर रहे हैं। स्थिति को देखते हुए बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था। पुलिस ने विरोध कर रहे लोगों को धरना स्थल और पूर्व मुख्यमंत्री के काफिले से दूर रखा। लगभग एक घंटे तक चले विरोध प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रही और किसी अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली।

विस्थापितों की मांगों को बताया न्यायसंगत

धरना को संबोधित करते हुए अर्जुन मुंडा ने कहा कि विस्थापित परिवारों की मांगें पूरी तरह न्यायसंगत हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्व में कंपनी प्रबंधन और प्रभावित ग्रामीणों के बीच हुए समझौतों को अब तक लागू नहीं किया गया है। साथ ही विस्थापितों द्वारा सौंपे गए मांग पत्रों पर भी अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि प्रभावित परिवारों के अधिकारों की अनदेखी स्वीकार नहीं की जाएगी और समस्याओं के समाधान तक आंदोलन जारी रहेगा।

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राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी तेज

धरना और विरोध प्रदर्शन के दौरान किसी राजनीतिक दल का आधिकारिक बैनर नहीं दिखा, लेकिन पूरे घटनाक्रम में राजनीतिक रंग स्पष्ट नजर आया। भाजपा नेताओं ने स्थानीय विधायक की भूमिका पर सवाल उठाए, जबकि भाजपा ने विरोध प्रदर्शन को सत्तारूढ़ दल समर्थित बताया। वहीं विरोध कर रहे ग्रामीणों ने अपने आंदोलन को स्थानीय मुद्दों और ग्रामसभा के निर्णयों से जुड़ा बताया।

https://samacharpost.live/2026/06/jharkhand-giridih-yuvak-shav-railway-track-hatya-ashanka/
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Rupa Kumari

Reporter | Samachar Postमैंने सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ झारखंड से पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री ली है। पत्रकारिता के क्षेत्र में बतौर रिपोर्टर मेरा अनुभव फिलहाल एक साल से कम है। सामाचार पोस्ट मीडिया के साथ जुड़कर स्टाफ रिपोर्टर के रूप में काम कर रही हूं।See Profile

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