Samachar Post रिपोर्टर, जमशेदपुर : सोनारी में सुवर्णरेखा और खरकई नदियों के संगम के पास कचरा डंपिंग के मामले में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने सख्त रुख अपनाया है। सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स, 2016 के उल्लंघन और पूर्व में जारी निर्देशों की अनुपालन रिपोर्ट दाखिल नहीं होने पर एनजीटी की ईस्टर्न जोन बेंच, कोलकाता ने पूर्वी सिंहभूम के उपायुक्त को अगली सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 27 नवंबर को होगी। 15 सितंबर को हुई सुनवाई में न्यायमूर्ति अरुण कुमार त्यागी की अध्यक्षता वाली पीठ ने पाया कि पहले पर्याप्त समय दिए जाने के बावजूद सोनारी डंपिंग साइट से जुड़े आदेशों पर हुई कार्रवाई की अपेक्षित रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की गई। ट्रिब्यूनल ने डीसी को अगली सुनवाई में स्वयं या वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए उपस्थित होकर जवाब देने को कहा है।
नदियों के संगम के पास डंपिंग साइट लंबे समय से विवाद में
सोनारी में नदियों के संगम के नजदीक स्थित लैंडफिल साइट लंबे समय से विवाद का विषय रही है। एनजीटी ने पहले भी सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स, 2016 के तहत कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण और डंपिंग साइट के उचित प्रबंधन को लेकर निर्देश दिए थे। पूर्व में ट्रिब्यूनल ने 31 दिसंबर 2024 तक डंपिंग साइट से कचरा हटाने, बायो-माइनिंग कराने और जमीन को बहाल करने का निर्देश दिया था। डंपिंग साइट पर आग लगने की घटनाओं के बाद वैकल्पिक लैंडफिल साइट विकसित करने और सोनारी की पुरानी साइट के कचरे का निस्तारण मार्च 2026 तक पूरा करने को भी कहा गया था।
अनुपालन रिपोर्ट नहीं देने पर ट्रिब्यूनल ने जताई नाराजगी
15 सितंबर की सुनवाई में सामने आया कि बार-बार समय दिए जाने के बावजूद पूर्वी सिंहभूम जिला प्रशासन की ओर से अनुपालन रिपोर्ट दाखिल नहीं की गई। हालांकि, झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने 8 अप्रैल को अपनी रिपोर्ट ट्रिब्यूनल के समक्ष प्रस्तुत कर दी थी। प्रशासन की ओर से रिपोर्ट में हुई देरी को देखते हुए एनजीटी ने अब उपायुक्त को अगली सुनवाई में उपस्थित होकर पूर्व के निर्देशों पर हुई कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट करने को कहा है।
कचरा निस्तारण और वैकल्पिक साइट बड़ी चुनौती
सोनारी डंपिंग साइट सुवर्णरेखा और खरकई नदियों के संगम के काफी करीब स्थित है। ऐसे में लंबे समय से जमा कचरे का निस्तारण, बायो-माइनिंग, डंपिंग साइट पर आग की घटनाओं पर नियंत्रण और वैकल्पिक लैंडफिल साइट की व्यवस्था प्रशासन के सामने प्रमुख मुद्दे हैं। अब 27 नवंबर को होने वाली सुनवाई में जिला प्रशासन को एनजीटी के पूर्व निर्देशों के अनुपालन की स्थिति और अब तक की गई कार्रवाई का ब्योरा प्रस्तुत करना होगा।






















