Samachar Post रिपोर्टर, रांची : राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) की पहली जिला-स्तरीय श्रम बाजार रिपोर्ट में झारखंड के रोजगार परिदृश्य में जिलेवार बड़ा अंतर सामने आया है। बोकारो में बेरोजगारी दर 8.6 प्रतिशत दर्ज की गई, जो रिपोर्ट में शामिल राज्य के 10 जिलों में सबसे अधिक है। इसके बाद धनबाद में 8 प्रतिशत बेरोजगारी दर रही। वहीं, पश्चिमी सिंहभूम में श्रमबल की भागीदारी राज्य के औसत से काफी अधिक दर्ज की गई।
बोकारो, धनबाद और पूर्वी सिंहभूम की LFPR कम
झारखंड में औसत श्रम बल भागीदारी दर (LFPR) 59.8 प्रतिशत रही। इसके मुकाबले धनबाद में यह 50.8 प्रतिशत, पूर्वी सिंहभूम में 51.2 प्रतिशत और बोकारो में 54.3 प्रतिशत दर्ज की गई। इसी तरह वर्कर पॉपुलेशन रेशियो (WPR) भी इन औद्योगिक जिलों में राज्य के औसत 58.2 प्रतिशत से नीचे रहा। धनबाद का WPR 46.7 प्रतिशत, पूर्वी सिंहभूम का 49 प्रतिशत और बोकारो का 49.6 प्रतिशत दर्ज किया गया।

बोकारो की बेरोजगारी दर 8.6%, धनबाद 8%
रिपोर्ट के मुताबिक, 10 जिलों में बोकारो की बेरोजगारी दर सबसे अधिक 8.6 प्रतिशत रही। धनबाद में यह 8 प्रतिशत और पूर्वी सिंहभूम में 4.3 प्रतिशत दर्ज की गई। पूरे झारखंड की औसत बेरोजगारी दर 2.7 प्रतिशत रही। आंकड़े बताते हैं कि बड़े औद्योगिक और खनन केंद्र होने के बावजूद इन जिलों में श्रमबल में भागीदारी और रोजगार से जुड़े कई संकेतक राज्य औसत से नीचे हैं। हालांकि, रिपोर्ट इन अंतर के पीछे किसी एक कारण को निश्चित रूप से जिम्मेदार नहीं ठहराती।
युवाओं में NEET दर भी ज्यादा
15 से 29 वर्ष आयु वर्ग के उन युवाओं का अनुपात, जो न रोजगार में हैं, न शिक्षा में और न ही किसी प्रशिक्षण में (NEET), धनबाद में 32 प्रतिशत रहा। बोकारो में यह 30 प्रतिशत और पूर्वी सिंहभूम में 28.3 प्रतिशत दर्ज किया गया। राज्य का औसत 21 प्रतिशत रहा। यह संकेत देता है कि औद्योगिक जिलों में युवा रोजगार और शिक्षा-प्रशिक्षण से बाहर रहने की समस्या भी रिपोर्ट में सामने आई है।
पश्चिमी सिंहभूम में श्रम भागीदारी सबसे ज्यादा
दूसरी ओर, पश्चिमी सिंहभूम में LFPR 68.3 प्रतिशत और WPR 67.1 प्रतिशत दर्ज किया गया। यहां 15-29 वर्ष आयु वर्ग की NEET दर 10.4 प्रतिशत रही। पलामू और हजारीबाग में भी श्रम भागीदारी और रोजगार से जुड़े अनुपात बोकारो, धनबाद और पूर्वी सिंहभूम की तुलना में अधिक रहे।

आंकड़े रोजगार की गुणवत्ता नहीं बताते
NSO के जिला-स्तरीय आंकड़े रोजगार की उपलब्धता और श्रमबल की भागीदारी का तुलनात्मक चित्र देते हैं, लेकिन केवल LFPR, WPR और बेरोजगारी दर से यह पता नहीं चलता कि उपलब्ध रोजगार कितना नियमित, सुरक्षित या बेहतर आय वाला है। रिपोर्ट में औद्योगिक जिलों के आंकड़ों के संदर्भ में कौशल-असंगति, युवाओं की भागीदारी, प्रवासन और स्थानीय लोगों की औद्योगिक रोजगार तक पहुंच जैसे संभावित पहलुओं पर सवाल उठते हैं।




















