Samachar Post रिपोर्टर, रांची : गंभीर रक्त संबंधी बीमारियों और महिलाओं में होने वाले कैंसर के आधुनिक उपचार को लेकर नारायणा हेल्थ सिटी, बेंगलुरु के विशेषज्ञों ने रांची में एक एजुकेशनल क्लिनिकल ब्रीफिंग आयोजित की। इसमें बोन मैरो ट्रांसप्लांट (BMT), CAR-T सेल थेरेपी, गायनेकोलॉजिकल कैंसर और मल्टीडिसिप्लिनरी कैंसर केयर के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने बताया कि जटिल कैंसर और गंभीर रक्त संबंधी बीमारियों के प्रबंधन में समय पर जांच, बीमारी की सटीक पहचान और विशेषज्ञों की संयुक्त टीम से इलाज की योजना बनाना महत्वपूर्ण है। कार्यक्रम में इम्यूनोथेरेपी, रोबोटिक सर्जरी, साइटोरिडक्टिव सर्जरी और HIPEC जैसी तकनीकों की भूमिका पर भी जानकारी दी गई।
गंभीर रक्त संबंधी बीमारियों में बोन मैरो ट्रांसप्लांट की भूमिका
एक्यूट ल्यूकेमिया, एडवांस्ड लिम्फोमा और मल्टीपल मायलोमा जैसी बीमारियों के इलाज में कई बार चुनौतीपूर्ण परिस्थितियां सामने आती हैं, खासकर जब सामान्य कीमोथेरेपी से अपेक्षित परिणाम नहीं मिलते। विशेषज्ञों के अनुसार, बोन मैरो ट्रांसप्लांटेशन में मरीज की स्थिति और बीमारी के आधार पर स्वयं मरीज की स्टेम सेल, पूरी तरह मैच करने वाले डोनर या हाफ-मैच्ड यानी हैप्लोआइडेंटिकल डोनर की स्टेम सेल का इस्तेमाल किया जा सकता है। बेहतर कंडीशनिंग रेजिमेन, ग्राफ्ट प्रोसेसिंग और ट्रांसप्लांट के बाद निगरानी से चुनिंदा मरीजों के इलाज के विकल्प बढ़े हैं। नारायणा हेल्थ सिटी के क्लिनिकल डायरेक्टर और सीनियर कंसल्टेंट हेमेटोलॉजिस्ट डॉ. शरत दामोदर ने कहा कि CAR-T सेल थेरेपी और आधुनिक बोन मैरो ट्रांसप्लांट जैसी तकनीकों ने उन मरीजों के लिए नए विकल्प उपलब्ध कराए हैं, जिनकी बीमारी दोबारा लौट आई है या सामान्य उपचार से नियंत्रित नहीं हो रही है। उन्होंने यह भी कहा कि इन उपचारों में साक्ष्य-आधारित प्रोटोकॉल का पालन, संभावित जटिलताओं की निगरानी और मरीजों व रेफर करने वाले डॉक्टरों को सही जानकारी देना जरूरी है।
CAR-T सेल थेरेपी से बढ़ रहे हैं उपचार के विकल्प
CAR-T सेल थेरेपी में मरीज की T-सेल्स को एकत्र कर उन्हें इस तरह संशोधित किया जाता है कि वे कैंसर कोशिकाओं को पहचानकर उन पर हमला कर सकें। इसका इस्तेमाल कुछ विशेष प्रकार के कैंसर में किया जाता है, खासकर उन मामलों में जहां बीमारी दोबारा उभर आई हो या पहले के उपचारों से पर्याप्त लाभ न मिला हो। कार्यक्रम में साझा किए गए संस्थान के आंकड़ों के अनुसार, बच्चों और वयस्कों में 3,000 से अधिक बोन मैरो ट्रांसप्लांट किए गए हैं। वहीं, वयस्क मरीजों में CAR-T सेल थेरेपी की 25 से अधिक प्रक्रियाएं की गई हैं। ये आंकड़े संस्थान की ओर से प्रस्तुत किए गए। विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि इन उपचारों की उपयुक्तता मरीज की बीमारी, उसकी अवस्था और चिकित्सकीय स्थिति के आधार पर तय की जाती है।
महिलाओं के कैंसर में शुरुआती पहचान और व्यक्तिगत उपचार पर जोर
ब्रीफिंग में सर्वाइकल, ओवेरियन, एंडोमेट्रियल और वल्वोवैजाइनल कैंसर के उपचार पर भी चर्चा हुई। विशेषज्ञों के अनुसार, बीमारी का देर से पता चलना इलाज को अधिक जटिल बना सकता है। इसलिए नियमित जांच, शुरुआती लक्षणों की पहचान और समय पर विशेषज्ञ से परामर्श महत्वपूर्ण है। सर्वाइकल कैंसर की स्क्रीनिंग में पैप स्मीयर और HPV टेस्ट जैसी जांचों की भूमिका पर भी जानकारी दी गई। वहीं, कैंसर के प्रकार, अवस्था और मरीज की स्थिति के अनुसार सर्जरी, रेडिएशन, कीमोथेरेपी और अन्य उपयुक्त उपचारों का चयन किया जाता है। नारायणा हेल्थ सिटी के सीनियर कंसल्टेंट और क्लिनिकल लीड—गायनेकोलॉजिक ऑन्कोलॉजी डॉ. रोहित रघुनाथ रानाडे ने कहा कि महिलाओं में कैंसर के प्रभावी प्रबंधन के लिए शुरुआती चिकित्सकीय मूल्यांकन, सटीक स्टेजिंग और व्यक्तिगत उपचार योजना जरूरी है। उन्होंने बताया कि पेल्विक कैंसर के इलाज में सर्जिकल, मेडिकल और रेडिएशन विशेषज्ञों के बीच समन्वय से मरीज की जरूरतों के अनुरूप उपचार तय करने में मदद मिलती है।
रोबोटिक सर्जरी और HIPEC जैसी तकनीकों पर चर्चा
कार्यक्रम में मिनिमली इनवेसिव और रोबोटिक सर्जरी के साथ साइटोरिडक्टिव सर्जरी तथा HIPEC के उपयोग पर भी जानकारी दी गई। इन तकनीकों का इस्तेमाल चुनिंदा मरीजों में कैंसर के प्रकार और उसकी अवस्था के आधार पर किया जाता है। संस्थान की ओर से साझा आंकड़ों के मुताबिक, नारायणा हेल्थ सिटी में 4,000 से अधिक रोबोटिक सर्जरी की गई हैं। इनमें 1,500 से अधिक गायनेकोलॉजिकल ऑन्कोलॉजी प्रक्रियाएं शामिल हैं। विशेषज्ञों ने जोर दिया कि किसी भी आधुनिक तकनीक का चयन बीमारी की स्थिति, उपलब्ध चिकित्सकीय साक्ष्य और मरीज की जरूरतों के आधार पर होना चाहिए।
मल्टीडिसिप्लिनरी टीम से तैयार होती है इलाज की योजना
ब्रीफिंग में मल्टीडिसिप्लिनरी ट्यूमर बोर्ड (MTB) की भूमिका पर भी चर्चा की गई। इसमें मेडिकल, सर्जिकल और रेडिएशन ऑन्कोलॉजिस्ट के साथ पैथोलॉजिस्ट, रेडियोलॉजिस्ट और न्यूक्लियर मेडिसिन विशेषज्ञ मिलकर मरीज की रिपोर्ट और बीमारी की स्थिति का आकलन करते हैं। इस प्रक्रिया से उपचार के विभिन्न विकल्पों पर विचार कर समन्वित योजना तैयार करने में मदद मिलती है। विशेषज्ञों ने कहा कि क्षेत्रीय अस्पतालों और विशेष कैंसर केंद्रों के बीच बेहतर समन्वय से मरीजों को समय पर विशेषज्ञों तक पहुंचाने और उपचार में देरी कम करने में सहायता मिल सकती है। कार्यक्रम का उद्देश्य पूर्वी भारत के स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं के बीच चिकित्सकीय जानकारी साझा करना और मरीजों को बोन मैरो ट्रांसप्लांट, सेलुलर थेरेपी तथा महिलाओं के कैंसर के आधुनिक उपचार विकल्पों के बारे में जागरूक करना था




















