झारखंडी क्षेत्रीय कलाकारों ने अश्लीलता के खिलाफ खोला मोर्चा, DC को सौंपा ज्ञापन

Rupa Kumari | July 22, 2026 | 12:43 PM IST

Samachar Post रिपोर्टर, रांची : झारखंडी क्षेत्रीय भाषा, कला और संस्कृति में बढ़ती अश्लीलता एवं फूहड़ता के खिलाफ झारखंडी क्षेत्रीय कलाकार सोसाइटी ने अभियान तेज कर दिया है। इसी क्रम में सोसाइटी के प्रतिनिधिमंडल ने रांची के उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्री को ज्ञापन सौंपकर क्षेत्रीय संस्कृति के नाम पर अश्लील सामग्री प्रसारित करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की। उपायुक्त ने कलाकारों को मामले में उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया, जिसके बाद प्रतिनिधिमंडल ने उनका आभार व्यक्त किया।

सांस्कृतिक विरासत को बचाने की पहल

सोसाइटी से जुड़े कलाकारों ने कहा कि झारखंड की क्षेत्रीय भाषाएं और लोक संस्कृति अपनी विशिष्ट पहचान, मिठास और समृद्ध परंपराओं के लिए जानी जाती हैं। वरिष्ठ कलाकारों ने वर्षों की मेहनत और समर्पण से राज्य की सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने का काम किया है। कलाकारों का कहना है कि वर्तमान पीढ़ी की जिम्मेदारी है कि वह इस विरासत को आगे बढ़ाए और अश्लीलता तथा फूहड़ता जैसी प्रवृत्तियों से इसकी गरिमा की रक्षा करे।

9 भाषाओं और 24 जिलों के कलाकार हुए एकजुट

सोसाइटी के अनुसार, झारखंड की सांस्कृतिक पहचान को सुरक्षित रखने के इस अभियान को राज्यभर के कलाकारों का व्यापक समर्थन मिल रहा है। झारखंड की 9 क्षेत्रीय भाषाओं और 24 जिलों के कलाकार इस मुहिम से जुड़ चुके हैं। इस अभियान को पद्मश्री मुकुंद नायक, पवन रॉय, मोनू राज, मनोज शहरी, पंकज रॉय, अनीता बाड़ा, वर्षा लकड़ा, सरिता देवी, कवि किसन, नितेश कच्छप और विवेक नायक सहित अनेक क्षेत्रीय कलाकारों का समर्थन प्राप्त है।

अश्लील सामग्री पर कार्रवाई की मांग

कलाकारों ने प्रशासन से मांग की है कि क्षेत्रीय भाषा, लोकगीत, संगीत और संस्कृति के नाम पर अश्लील एवं फूहड़ सामग्री प्रसारित करने वाले व्यक्तियों और संस्थाओं के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए। उनका कहना है कि इस तरह की सामग्री न केवल झारखंड की सांस्कृतिक पहचान को नुकसान पहुंचा रही है, बल्कि समाज में गलत संदेश भी प्रसारित कर रही है।

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संस्कृति की गरिमा बनाए रखने पर जोर

सोसाइटी ने स्पष्ट किया कि यह अभियान किसी व्यक्ति या समूह विशेष के खिलाफ नहीं है। इसका उद्देश्य केवल झारखंड की सांस्कृतिक विरासत, सामाजिक मूल्यों और क्षेत्रीय भाषाओं की गरिमा को बनाए रखना है। कलाकारों ने कहा कि यदि समय रहते इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए तो क्षेत्रीय कला और संस्कृति की मूल पहचान प्रभावित हो सकती है। इसलिए सभी कलाकारों, सामाजिक संगठनों और प्रशासन को मिलकर इस चुनौती का सामना करना होगा।

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