रात में महिला के घर घुसकर कपड़े उठाना, पकड़ना…फिर भी रेप का प्रयास साबित नहीं, हाईकोर्ट ने बदली सजा

Samachar Post रिपोर्टर,रांची : झारखंड हाईकोर्ट ने दुष्कर्म के प्रयास से जुड़े एक मामले में अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा कि किसी महिला के घर में रात के समय घुसना, उसके कपड़े उठाना और उसे पकड़ना अपने आप में दुष्कर्म के प्रयास का अपराध साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं है, यदि दुष्कर्म करने की दिशा में कोई स्पष्ट और प्रत्यक्ष कृत्य साक्ष्यों से साबित न हो। जस्टिस प्रदीप कुमार श्रीवास्तव की एकल पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए आरोपी की भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 376/511 के तहत हुई दोषसिद्धि को बदलकर धारा 354 के तहत कर दिया। हालांकि, महिला के घर में जबरन घुसने से संबंधित धारा 452 के तहत दोषसिद्धि को बरकरार रखा गया।

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क्या था पूरा मामला?

यह मामला 27 दिसंबर 1999 की रात की घटना से जुड़ा है। अभियोजन के अनुसार, महिला अपने घर में सो रही थी। इसी दौरान आरोपी ने कथित तौर पर जबरन दरवाजा खोलकर घर में प्रवेश किया। महिला ने आरोप लगाया था कि आरोपी ने उसके कपड़े उठाए और उसके साथ दुष्कर्म का प्रयास किया। महिला के शोर मचाने पर उसकी मां और आसपास के लोग मौके पर पहुंचे, जिसके बाद आरोपी वहां से भाग गया। मामले में आरोपी के खिलाफ IPC की धारा 376/511 और 452 के तहत मामला दर्ज किया गया था।

हाईकोर्ट ने क्यों माना कि रेप का प्रयास साबित नहीं हुआ?

हाईकोर्ट ने मामले के साक्ष्यों की समीक्षा करते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष की ओर से ऐसा विशिष्ट प्रत्यक्ष कृत्य साबित नहीं हुआ, जिसे दुष्कर्म करने की दिशा में पर्याप्त रूप से निकट माना जा सके। अदालत के अनुसार, महिला को पकड़ना और उसके साथ मारपीट या अशोभनीय व्यवहार करना गंभीर कृत्य हो सकता है, लेकिन दुष्कर्म के प्रयास का आरोप साबित करने के लिए उससे आगे का ऐसा कृत्य होना चाहिए जो सीधे दुष्कर्म किए जाने की ओर बढ़ता हो।

लज्जा भंग करने का अपराध माना

हालांकि, कोर्ट ने यह नहीं माना कि आरोपी का कृत्य अपराध की श्रेणी से बाहर था। अदालत ने महिला को पकड़ने और घटनाक्रम से जुड़े साक्ष्यों को देखते हुए माना कि यह उसकी लज्जा भंग करने के इरादे से हमला या आपराधिक बल प्रयोग के दायरे में आता है। इसी आधार पर धारा 376/511 की दोषसिद्धि को धारा 354 IPC में बदल दिया गया। साथ ही महिला के घर में जबरन प्रवेश से संबंधित धारा 452 IPC की दोषसिद्धि बरकरार रखी गई।

26 साल से ज्यादा पुराना था मामला

कोर्ट ने यह भी ध्यान में रखा कि घटना को 26 साल से ज्यादा समय बीत चुका है। आरोपी का यह पहला अपराध था और उसके पिछले आपराधिक रिकॉर्ड की जानकारी भी सामने नहीं आई। इन परिस्थितियों को देखते हुए हाईकोर्ट ने उसे अब तक जेल में बिताई गई करीब 8 महीने की अवधि को ही सजा के रूप में पर्याप्त माना। मामला कमलेंदु महतो उर्फ खोखा बनाम झारखंड राज्य, क्रिमिनल अपील (SJ) संख्या 1332/2006 से संबंधित है। फैसला 31 अगस्त 2026 को सुनाया गया।

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