Samachar Post रिपोर्टर, रांची : झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने JPSC और JSSC की प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर हेमंत सोरेन सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि राज्य के छात्र केवल परीक्षाएं रद्द करने से संतुष्ट नहीं हैं, बल्कि पूरे मामले की CBI जांच चाहते हैं और इससे कम कुछ भी स्वीकार्य नहीं होगा। रघुवर दास ने सरकार द्वारा वर्ष 2014 से हुई भर्ती परीक्षाओं की जांच कराने के फैसले का स्वागत किया, लेकिन साथ ही कहा कि झारखंड में मामला केवल भर्ती घोटालों का नहीं, बल्कि “जांच में घोटाले” का भी है। इसलिए निष्पक्ष और विश्वसनीय जांच के लिए CBI को जिम्मेदारी सौंपी जानी चाहिए।
छात्रों की तीन प्रमुख मांगों का किया जिक्र
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि आंदोलनरत छात्रों की मुख्य मांगों में JPSC पीटी परीक्षा रद्द करना, JSSC-CGL परीक्षा रद्द करना और पूरे मामले की CBI जांच कराना शामिल है। उन्होंने दावा किया कि सरकार ने 9 अगस्त को JPSC पीटी परीक्षा रद्द करने की घोषणा तो कर दी, लेकिन अब तक इसकी आधिकारिक अधिसूचना जारी नहीं हुई है। उन्होंने सवाल उठाया कि JPSC में वर्तमान में अध्यक्ष और सदस्य नहीं होने की स्थिति में परीक्षा रद्द करने की औपचारिक प्रक्रिया कौन पूरी करेगा।
अपने कार्यकाल की परीक्षाओं का किया बचाव
रघुवर दास ने अपने कार्यकाल में आयोजित प्रतियोगी परीक्षाओं का बचाव करते हुए कहा कि उस दौरान किसी भी परीक्षा को लेकर बड़े पैमाने पर धांधली या सीट बेचने जैसे आरोप सामने नहीं आए थे। उन्होंने कहा कि छठी JPSC परीक्षा में हिंदी और अंग्रेजी अंकों को जोड़ने को लेकर तकनीकी विवाद जरूर हुआ था, लेकिन भ्रष्टाचार या नियुक्ति घोटाले के आरोप नहीं लगे थे। साथ ही उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से पूछा कि यदि 2019 में सत्ता संभालने के बाद उन्हें अनियमितताओं की जानकारी थी, तो जांच शुरू करने में इतने वर्ष क्यों लग गए।
राहुल गांधी के पत्र का भी उल्लेख
पूर्व मुख्यमंत्री ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को लिखे गए पत्र का जिक्र करते हुए कहा कि राहुल गांधी ने छात्रों की मांगों को वैध बताया है। उन्होंने सवाल किया कि यदि कांग्रेस भी छात्रों की मांगों को सही मानती है, तो फिर राज्य सरकार CBI जांच की सिफारिश क्यों नहीं कर रही। रघुवर दास ने राहुल गांधी के रांची न आने को लेकर भी सवाल उठाए और दावा किया कि उन्हें सत्ता पक्ष के सूत्रों से कुछ जानकारियां मिली हैं। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
CID जांच की निष्पक्षता पर उठाए सवाल
रघुवर दास ने प्रतियोगी परीक्षाओं की जांच कर रही CID की भूमिका पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने आरोप लगाया कि जांच एजेंसी की निष्पक्षता को लेकर पहले से ही सवाल उठते रहे हैं। उन्होंने कहा कि TDPL से जुड़ी कई परीक्षाओं को रद्द किया गया है, लेकिन इसी CID ने पहले JSSC-CGL परीक्षा को क्लीन चिट दी थी। ऐसे में अब उसी एजेंसी की जांच पर भरोसा करना कठिन है।

योग्य और दागदार अभ्यर्थियों में अंतर करने की मांग
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी भर्ती प्रक्रिया को पूरी तरह रद्द करने से पहले व्यापक जांच जरूरी है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि पहले योग्य और कथित रूप से दागदार अभ्यर्थियों की पहचान अलग-अलग की जानी चाहिए। उनके अनुसार, यदि जांच के बाद दोनों के बीच अंतर करना संभव न हो, तभी पूरी नियुक्ति रद्द करने जैसे कदम पर विचार किया जाना चाहिए।
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मृत अभ्यर्थियों के परिवारों को मुआवजे की मांग
रघुवर दास ने उत्पाद सिपाही भर्ती दौड़ के दौरान जान गंवाने वाले 19 अभ्यर्थियों का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने राज्य सरकार से मृतकों के परिजनों को एक-एक करोड़ रुपये मुआवजा देने की मांग की। उन्होंने कहा कि सरकार को छात्रों की चिंताओं को गंभीरता से लेते हुए भर्ती घोटालों की पारदर्शी जांच सुनिश्चित करनी चाहिए, ताकि युवाओं का प्रतियोगी परीक्षा प्रणाली पर भरोसा बहाल हो सके।

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मैंने सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ झारखंड से पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री ली है। पत्रकारिता के क्षेत्र में बतौर रिपोर्टर मेरा अनुभव फिलहाल एक साल से कम है। सामाचार पोस्ट मीडिया के साथ जुड़कर स्टाफ रिपोर्टर के रूप में काम कर रही हूं।

