Samachar Post रिपोर्टर, रांची : झारखंड प्रारंभिक विद्यालय प्रशिक्षित सहायक आचार्य संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा-2023 को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा आदेश दिया है। अदालत ने झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की ओर से जारी संशोधित रिजल्ट को रद्द कर दिया है और चार सप्ताह के भीतर नया परिणाम जारी करने का निर्देश दिया है। 17 सितंबर 2026 को हुई सुनवाई के बाद यह आदेश सामने आया। इसके साथ नॉर्मलाइजेशन से जुड़ी अवमानना याचिका की सुनवाई अलग से होगी। मामले की अगली सुनवाई 28 अक्टूबर 2026 को निर्धारित है।
नए रिजल्ट से बदल सकती है चयन सूची
संशोधित रिजल्ट रद्द होने के बाद अब JSSC को फिर से परिणाम तैयार करना होगा। इससे पहले जारी संशोधित परिणाम में कुछ ऐसे अभ्यर्थी चयन सूची से बाहर हो गए थे, जो पुराने परिणाम में सफल थे। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, पिछले संशोधित रिजल्ट में करीब 1122 अभ्यर्थियों को नुकसान हुआ था। कक्षा 1 से 5 के 384, कक्षा 6 से 8 के विज्ञान एवं गणित के 207, भाषा के 246 और सामाजिक विज्ञान के 285 अभ्यर्थी संशोधित परिणाम में अपनी जगह नहीं बना सके थे। बाद में अतिरिक्त परिणाम भी जारी किए गए थे, इसलिए प्रभावित अभ्यर्थियों की संख्या इससे अधिक हो सकती है।
नियुक्त सहायक आचार्यों पर क्या होगा असर?
राज्य में इस भर्ती प्रक्रिया के तहत नियुक्त हो चुके हजारों सहायक आचार्यों की स्थिति भी नए परिणाम के बाद प्रभावित हो सकती है। उपलब्ध रिपोर्टों में करीब 11,300 नियुक्त शिक्षकों पर संभावित असर की बात कही गई है, जबकि कुछ रिपोर्टों में लगभग 1,500 नियुक्तियों पर विशेष रूप से असर पड़ने की आशंका जताई गई है। हालांकि, केवल संशोधित रिजल्ट रद्द होने से किसी शिक्षक की नौकरी स्वतः समाप्त हो जाती है, ऐसा निष्कर्ष अभी नहीं निकाला जा सकता। नई मेरिट सूची और उससे जुड़े प्रशासनिक आदेशों के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि किन नियुक्तियों पर वास्तविक असर पड़ता है।
JTET में आरक्षित वर्ग के क्वालीफाइंग मार्क्स का मुद्दा
इस मामले में झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा (JTET) के अलग-अलग न्यूनतम क्वालीफाइंग अंक भी महत्वपूर्ण हैं। उपलब्ध नियमों के अनुसार सामान्य वर्ग के लिए न्यूनतम 60 प्रतिशत और एससी, एसटी, पिछड़ा वर्ग तथा दिव्यांग अभ्यर्थियों के लिए 52 प्रतिशत अंक का प्रावधान बताया गया है। सहायक आचार्य भर्ती में ऐसे अभ्यर्थी भी शामिल हुए थे, जिन्होंने JTET में अपने संबंधित आरक्षित वर्ग के लिए निर्धारित न्यूनतम अंक हासिल किए थे। अब नई मेरिट तैयार होने पर यह देखा जाएगा कि नियुक्ति परीक्षा में उनके अंक अनारक्षित श्रेणी की मेरिट में स्थान बनाने के लिए पर्याप्त हैं या नहीं।
आरक्षण और अनारक्षित कोटे को लेकर क्या बदलेगा?
मामले का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि किसी अभ्यर्थी का JTET में आरक्षित वर्ग के तहत क्वालीफाई करना अपने आप उसे नियुक्ति परीक्षा में केवल आरक्षित सीट तक सीमित नहीं करता। यदि वह नियुक्ति परीक्षा की मेरिट में अनारक्षित वर्ग के लिए निर्धारित स्तर पर स्थान बनाता है, तो नए परिणाम में उसकी स्थिति उसी आधार पर तय की जा सकती है। दूसरी ओर, अनारक्षित कोटे में पहले चयनित ऐसे अभ्यर्थियों की स्थिति बदल सकती है, जिनके मुकाबले आरक्षित वर्ग के किसी अभ्यर्थी के नियुक्ति परीक्षा में अधिक अंक हों। अंतिम स्थिति JSSC की नई मेरिट सूची जारी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
अब चार सप्ताह में जारी होगा नया रिजल्ट
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अब JSSC को चार सप्ताह के भीतर नया परिणाम जारी करना है। इसके बाद चयन सूची, नियुक्त अभ्यर्थियों और बाहर होने वाले उम्मीदवारों की स्थिति सामने आएगी। नॉर्मलाइजेशन से जुड़ी अलग कानूनी कार्यवाही पर सुप्रीम कोर्ट में 28 अक्टूबर को सुनवाई होगी। ऐसे में सहायक आचार्य भर्ती से जुड़े अभ्यर्थियों और नियुक्त शिक्षकों की नजर अब JSSC के नए परिणाम और उसके बाद जारी होने वाले विभागीय निर्देशों पर है।




















