JSSC विवाद: IAS-IPS की कमान भी बेअसर, परीक्षा विवादों ने युवाओं के भविष्य पर उठाए सवाल

Meenu | August 18, 2026 | 11:53 AM IST

Samachar Post रिपोर्टर, रांची : झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) लंबे समय से प्रतियोगी परीक्षाओं और भर्ती प्रक्रियाओं को लेकर विवादों में रहा है। आयोग की कमान समय-समय पर वरिष्ठ IAS और IPS अधिकारियों को सौंपी गई, लेकिन परीक्षा संचालन और भर्ती प्रक्रिया से जुड़े विवाद पूरी तरह खत्म नहीं हो सके। युवाओं के लिए सरकारी नौकरी का रास्ता आसान बनाने और पारदर्शी तरीके से चयन प्रक्रिया संचालित करने की जिम्मेदारी वाले आयोग की कार्यप्रणाली पर लगातार सवाल उठते रहे हैं। फील्ड वर्कर परीक्षा से लेकर उत्पाद सिपाही और JSSC-CGL तक, अलग-अलग परीक्षाओं में अभ्यर्थियों ने अनियमितताओं और व्यवस्थागत खामियों को लेकर विरोध दर्ज कराया है।

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आयोग की कमान संभाल चुके प्रमुख अधिकारी

JSSC के इतिहास में कई वरिष्ठ प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। इनमें सेवानिवृत्त IAS अधिकारी मृदुला सिन्हा, सेवानिवृत्त IAS सुधीर त्रिपाठी, पूर्व DGP नीरज सिन्हा, IAS अधिकारी डॉ. मनीष रंजन और वर्तमान अध्यक्ष प्रशांत कुमार के नाम शामिल हैं। इन नियुक्तियों के पीछे आयोग की कार्यप्रणाली को बेहतर बनाने और परीक्षा व्यवस्था में सुधार की उम्मीद रही है। हालांकि, अलग-अलग समय पर सामने आए विवादों ने इन प्रयासों पर सवाल खड़े किए हैं।

फील्ड वर्कर परीक्षा 2024: केंद्र और एडमिट कार्ड को लेकर सवाल

फील्ड वर्कर प्रतियोगी परीक्षा 2024 के आयोजन को लेकर अभ्यर्थियों ने कई तरह की शिकायतें दर्ज कराईं। परीक्षा के लिए दूर-दराज के केंद्र आवंटित किए जाने और परीक्षा व्यवस्था में कथित तकनीकी समस्याओं को लेकर उम्मीदवारों में नाराजगी देखने को मिली। अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया कि कई उम्मीदवारों को उनके गृह जिले से काफी दूर परीक्षा केंद्र दिए गए। वहीं, एडमिट कार्ड से जुड़े तकनीकी मामलों और संताली भाषा के प्रश्नपत्र में कथित त्रुटियों को लेकर भी सवाल उठे। परीक्षा प्रक्रिया में सामने आई इन समस्याओं ने आयोग की तैयारी और व्यवस्थागत क्षमता पर बहस छेड़ दी।

उत्पाद सिपाही परीक्षा 2023: पेपर लीक के आरोपों से बढ़ा विवाद

उत्पाद सिपाही नियुक्ति परीक्षा 2023 भी JSSC की विवादित परीक्षाओं में शामिल रही। परीक्षा के दौरान प्रश्नपत्र लीक होने के आरोप सामने आए, जिसके बाद मामले ने गंभीर रूप ले लिया। इस मामले में पुलिस ने जांच के दौरान कई लोगों को गिरफ्तार किया। पेपर लीक के आरोपों ने परीक्षा की विश्वसनीयता और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए।

JSSC-CGL: परीक्षा विवाद से लेकर इंटरनेट बंदी तक

JSSC-CGL परीक्षा भी लंबे समय तक विवादों के केंद्र में रही। परीक्षा में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के आरोपों को लेकर अभ्यर्थियों ने आंदोलन किया। विरोध के दौरान राज्य में कानून-व्यवस्था को लेकर भी स्थिति चुनौतीपूर्ण हुई। सरकार ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए कुछ क्षेत्रों में इंटरनेट सेवाओं पर प्रतिबंध लगाने का फैसला लिया था। इस कदम ने परीक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक तैयारी को लेकर बहस को और तेज कर दिया। मामला न्यायिक प्रक्रिया तक पहुंचा और झारखंड हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक इसकी गूंज सुनाई दी। पूरे विवाद ने राज्य की प्रतियोगी परीक्षा व्यवस्था और JSSC की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए।

युवाओं के भविष्य पर पड़ता है सीधा असर

प्रतियोगी परीक्षाओं में किसी भी तरह की गड़बड़ी का सबसे बड़ा असर उन युवाओं पर पड़ता है, जो वर्षों तक तैयारी करने के बाद परीक्षा में शामिल होते हैं। एक परीक्षा के रद्द होने, परिणाम पर विवाद या नियुक्ति प्रक्रिया में देरी का असर अभ्यर्थियों के करियर पर पड़ सकता है। कई उम्मीदवार उम्र सीमा, आर्थिक दबाव और दूसरी नौकरियों के अवसरों के बीच अपना भविष्य तय करते हैं। ऐसे में JSSC जैसी भर्ती संस्था के लिए पारदर्शिता, परीक्षा सुरक्षा और समयबद्ध प्रक्रिया बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है।

आयोग की साख बचाना सबसे बड़ी चुनौती

लगातार सामने आने वाले विवादों के बीच JSSC के सामने सबसे बड़ी चुनौती अभ्यर्थियों का भरोसा दोबारा कायम करने की है। इसके लिए परीक्षा प्रक्रिया को तकनीकी रूप से मजबूत करने, प्रश्नपत्र की सुरक्षा सुनिश्चित करने, शिकायतों के समयबद्ध निपटारे और अभ्यर्थियों के साथ पारदर्शी संवाद की जरूरत है। आखिरकार, सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे हजारों युवाओं के लिए JSSC केवल एक भर्ती आयोग नहीं, बल्कि उनके भविष्य की उम्मीद है। इस उम्मीद को बनाए रखने के लिए आयोग की कार्यप्रणाली में विश्वसनीयता और जवाबदेही सबसे अहम होगी।

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