Samachar Post रिपोर्टर,हजारीबाग : पकरी बरवाडीह कोयला खनन परियोजना में मुआवजा, मजदूरी दर और गैरमजरूआ भूमि के भुगतान को लेकर पूर्व विधायक लोकनाथ महतो ने NTPC पर निर्धारित प्रावधानों का पालन नहीं करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन के समक्ष हुए समझौते और कंपनी के तय प्रावधानों के बावजूद भुगतान नहीं होने से बड़कागांव और केरेडारी क्षेत्र के रैयतों में असंतोष बढ़ रहा है।
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मुआवजे में अतिरिक्त राशि और ब्याज नहीं देने का आरोप
लोकनाथ महतो के अनुसार, कंपनी के निर्धारित प्रावधानों के तहत रैयती भूमि के मुआवजे पर 30 प्रतिशत अतिरिक्त राशि और Coal Bearing Areas लागू होने की तारीख से 12 प्रतिशत ब्याज का भुगतान किया जाना है। उन्होंने आरोप लगाया कि इन प्रावधानों का अब तक समुचित तरीके से पालन नहीं किया गया है। पूर्व विधायक ने कहा कि प्रभावित रैयतों को उनके अधिकार के अनुसार भुगतान मिलना चाहिए।
मजदूरी दर में भी मानकों का पालन नहीं होने का दावा
लोकनाथ महतो ने मजदूरी भुगतान को लेकर भी सवाल उठाए। उनके अनुसार, परियोजना में निर्धारित मजदूरी दर के तहत अकुशल मजदूर के लिए 1,250 रुपये, अर्धकुशल के लिए 1,281 रुपये, कुशल के लिए 1,313 रुपये और पूर्ण कुशल मजदूर के लिए 1,345 रुपये प्रतिदिन तय किए गए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि निर्धारित मानकों के अनुरूप मजदूरी का भुगतान नहीं किया जा रहा है।
कटऑफ डेट को लेकर भी जताई आपत्ति
पूर्व विधायक ने वर्ष 2016 को कटऑफ डेट निर्धारित किए जाने पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि भूमि अधिग्रहण के समय की वास्तविक स्थिति को कटऑफ डेट का आधार बनाया जाना चाहिए। गैरमजरूआ और जंगल-झाड़ी भूमि के संबंध में उन्होंने कंपनी के पूर्व निर्धारित प्रावधानों का हवाला देते हुए कहा कि 30 वर्ष से अधिक समय से कब्जे वाली भूमि के दावेदारों को मानवीय आधार पर रैयती भूमि के समान मुआवजा देने का प्रावधान था। वहीं, 30 वर्ष से कम अवधि से कब्जे वाली भूमि के लिए 10 लाख रुपये प्रति एकड़ की दर से भुगतान की बात कही गई थी। लोकनाथ महतो ने आरोप लगाया कि इन प्रावधानों को भी पूरी तरह लागू नहीं किया जा रहा है।
सड़क से न्यायालय तक आंदोलन की चेतावनी
लोकनाथ महतो ने कहा कि रैयतों और प्रभावित लोगों के हितों की अनदेखी स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मांगों पर सकारात्मक पहल नहीं हुई तो आंदोलन को सड़क से लेकर न्यायालय तक ले जाया जाएगा। उन्होंने कंपनी और प्रशासन से प्रभावित लोगों के हित में तय प्रावधानों के अनुसार भुगतान सुनिश्चित करने की मांग की।

2015 में जिला प्रशासन और NTPC के बीच हुई थी बैठक
पकरी बरवाडीह कोयला खनन परियोजना में रैयती भूमि के मुआवजे को लेकर जिला प्रशासन और NTPC के बीच 21 फरवरी और 21 मार्च 2015 को बैठक हुई थी। इसके बाद NTPC के कार्यकारी निदेशक ने 4 अप्रैल 2015 को हजारीबाग उपायुक्त को पत्र भेजकर बैठकों में लिए गए निर्णयों की जानकारी दी थी। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, रैयती भूमि के लिए 20 लाख रुपये प्रति एकड़ मुआवजा निर्धारित किया गया था। इसके अलावा 30 प्रतिशत अतिरिक्त राशि और CBA Act लागू होने की तारीख से 12 प्रतिशत ब्याज के भुगतान का प्रावधान बताया गया था।
गैरमजरूआ भूमि के लिए भी तय किए गए थे प्रावधान
बैठक में गैरमजरूआ और जंगल-झाड़ी भूमि को लेकर भी भुगतान का प्रावधान तय किया गया था। 30 वर्ष से कम अवधि से कब्जे वाली भूमि के दावेदारों के लिए 10 लाख रुपये प्रति एकड़ की दर से आजीविका क्षति (Livelihood Loss) के भुगतान का निर्णय बताया गया था। वहीं, 30 वर्ष से अधिक समय से कब्जे वाली भूमि के दावेदारों को मानवीय आधार पर रैयती भूमि के समान 20 लाख रुपये प्रति एकड़ भुगतान करने की बात कही गई थी। NTPC के तत्कालीन पत्र के अनुसार, जिला प्रशासन और कंपनी के बीच हुई बैठकों में लिए गए निर्णयों को NTPC बोर्ड से भी अनुमोदन मिलने की बात कही गई थी। कार्यकारी निदेशक ने उपायुक्त से इन निर्णयों के आधार पर आगे की कार्रवाई करने और परियोजना से जुड़े बाधित कार्यों को शुरू कराने में सहयोग का आग्रह किया था। मौके पर मुखिया संघ के अध्यक्ष रंजीत कुमार, डॉ. बालेश्वर महतो, चमन महतो, अवध किशोर यादव, लखन महतो, लखेश्वर महतो, लोकन महतो समेत कई किसान मौजूद रहे।

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