Samachar Post रिपोर्टर,रांची : झारखंड सरकार ने कल्याण विभाग के अधिकारियों को डिजिटल और आधुनिक प्रशासनिक व्यवस्था के अनुरूप तैयार करने के लिए नई प्रशिक्षण नीति लागू की है। नई अधिसूचना के तहत अब सेवा में नियुक्ति से लेकर पदोन्नति तक हर स्तर पर प्रशिक्षण अनिवार्य होगा। इतना ही नहीं, किसी भी प्रशिक्षण कार्यक्रम में 90 फीसदी उपस्थिति अनिवार्य रहेगी। निर्धारित उपस्थिति से कम रहने पर अधिकारियों की पदोन्नति और भविष्य की करियर ग्रोथ प्रभावित हो सकती है।
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नए अधिकारियों को करना होगा 8 सप्ताह का अनिवार्य प्रशिक्षण
नई व्यवस्था के अनुसार, सेवा में शामिल होने वाले प्रत्येक खंड कल्याण पदाधिकारी को आठ सप्ताह का आधारभूत प्रशिक्षण लेना होगा। यह प्रशिक्षण तीन चरणों में पूरा कराया जाएगा, जिसमें सैद्धांतिक ज्ञान, फील्ड अनुभव और संस्थागत प्रशिक्षण शामिल होगा। पहले चरण में एक सप्ताह तक विभागीय संरचना, कार्यालयी प्रक्रियाएं, डेटा प्रबंधन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की बुनियादी जानकारी दी जाएगी। दूसरे चरण में पांच सप्ताह तक जिला कल्याण कार्यालयों और समेकित जनजातीय विकास अभिकरणों में योजनाओं का व्यावहारिक प्रशिक्षण और भौतिक सत्यापन कराया जाएगा। इस दौरान अधिकारियों के प्रदर्शन का मूल्यांकन किया जाएगा। यदि किसी अधिकारी की ग्रेडिंग औसत से कम रहती है तो उसे दो सप्ताह का प्रशिक्षण दोबारा करना होगा। तीसरे चरण में दो सप्ताह तक कार्यालय प्रबंधन, कोर्ट केस प्रबंधन, मानव संसाधन, ई-ऑफिस और झारखंड सेवा संहिता जैसे विषयों पर विशेषज्ञों द्वारा प्रशिक्षण दिया जाएगा।
सेवारत अधिकारियों के लिए भी अनिवार्य होगा रिफ्रेशर कोर्स
सरकार ने केवल नए अधिकारियों के लिए ही नहीं, बल्कि पहले से कार्यरत अधिकारियों के लिए भी सेवाकालीन प्रशिक्षण अनिवार्य किया है। हर 6 से 8 वर्ष के अंतराल पर अधिकारियों को दो सप्ताह का रिफ्रेशर कोर्स करना होगा। इसके अलावा, पदोन्नति मिलने के बाद अधिकारियों को 3 से 5 दिनों का विशेष प्रशिक्षण भी दिया जाएगा, ताकि वे नई जिम्मेदारियों और प्रशासनिक भूमिकाओं को बेहतर ढंग से निभा सकें।

90 फीसदी उपस्थिति नहीं तो करियर पर पड़ेगा असर
नई नीति में प्रशिक्षण कार्यक्रमों के दौरान 90 प्रतिशत उपस्थिति अनिवार्य कर दी गई है। यदि कोई अधिकारी निर्धारित उपस्थिति पूरी नहीं करता है, तो उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जा सकती है। साथ ही, इसका सीधा असर उसकी पदोन्नति, मूल्यांकन और भविष्य की करियर प्रगति पर भी पड़ेगा।
ई-गवर्नेंस और डिजिटल वर्क कल्चर पर विशेष जोर
सरकार ने प्रशिक्षण नीति में ई-गवर्नेंस और डिजिटल वर्क कल्चर को विशेष प्राथमिकता दी है। अधिकारियों को ई-ऑफिस, HRMS मॉड्यूल, फाइल ट्रैकिंग सिस्टम और iGOT कर्मयोगी जैसे आधुनिक डिजिटल प्लेटफॉर्म का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसका उद्देश्य सरकारी कार्यों में पारदर्शिता बढ़ाना, फाइलों के त्वरित निस्तारण को सुनिश्चित करना और तकनीक आधारित प्रशासन को मजबूत करना है। नई व्यवस्था के लागू होने से कल्याण विभाग के अधिकारियों की कार्यकुशलता बढ़ने के साथ-साथ विभागीय सेवाओं में भी अधिक पारदर्शिता और जवाबदेही आने की उम्मीद है।

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