Samachar Post रिपोर्टर, रांची : झारखंड में एक ओर सड़क दुर्घटनाओं को कम करने के लिए सड़क सुरक्षा उपायों को प्रभावी बनाने की जरूरत है, वहीं दूसरी ओर परिवहन विभाग के भीतर ही कामकाज को लेकर सवाल उठ रहे हैं। परिवहन सचिव राजीव रंजन ने परिवहन आयुक्त संजीव कुमार बेसरा से सड़क सुरक्षा से जुड़ी योजनाओं की धीमी प्रगति को लेकर स्पष्टीकरण मांगा है। सचिव की ओर से जारी स्पष्टीकरण में परिवहन आयुक्त पर सड़क सुरक्षा योजनाओं के क्रियान्वयन में शिथिलता और उदासीनता बरतने तथा सक्षम प्राधिकार के आदेशों-निर्देशों का पालन नहीं करने की बात कही गई है। इसके जवाब में परिवहन आयुक्त ने 11 सितंबर को विस्तृत स्पष्टीकरण सौंपते हुए इन आरोपों से इनकार किया है।
परिवहन आयुक्त ने मानवबल की कमी को बताया प्रमुख वजह
अपने जवाब में संजीव कुमार बेसरा ने कहा है कि सड़क सुरक्षा से संबंधित योजनाओं के क्रियान्वयन में उनकी ओर से किसी तरह की शिथिलता या आदेशों की अवहेलना नहीं की गई है। उन्होंने योजनाओं की धीमी प्रगति के पीछे संस्थागत मानवबल की कमी, अधिकारियों के स्थानांतरण और महत्वपूर्ण पदों पर नियमित पदस्थापन नहीं होने को प्रमुख कारण बताया है। उनके अनुसार, उपलब्ध संसाधनों की कमी के बावजूद परिवहन विभाग से जुड़े कई महत्वपूर्ण कार्यों को एक साथ संचालित किया जा रहा है। ऐसे में विभागीय कामकाज पर अतिरिक्त दबाव बना हुआ है।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत बनी व्यवस्था पर भी सवाल
परिवहन आयुक्त ने अपने स्पष्टीकरण में Supreme Court Committee on Road Safety (SCCoRS) के निर्देशों का भी उल्लेख किया है। उनके अनुसार, इन निर्देशों के आधार पर झारखंड में सड़क सुरक्षा कार्यों की निगरानी और क्रियान्वयन के लिए संस्थागत व्यवस्था तैयार की गई थी। इसके तहत संयुक्त परिवहन आयुक्त, सड़क सुरक्षा का पद सृजित किया गया था। इसका उद्देश्य सड़क सुरक्षा से संबंधित योजनाओं की निगरानी और उनके प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित करना था। बेसरा के अनुसार, समय के साथ इस व्यवस्था में नियमित और समर्पित अधिकारियों-कर्मचारियों की कमी होती गई। इससे कामकाज की निरंतरता प्रभावित हुई और सड़क सुरक्षा से जुड़े दायित्वों का अपेक्षित स्तर पर संचालन मुश्किल हुआ।
संयुक्त परिवहन आयुक्त का पद खाली होने से निविदा कार्य प्रभावित
परिवहन आयुक्त ने 10 अक्टूबर 2025 को हुई राज्य सड़क सुरक्षा कोष प्रबंधन समिति की बैठक का भी हवाला दिया है। बैठक में स्वीकृत योजनाओं के संबंध में लीड एजेंसी से अद्यतन रिपोर्ट और योजनाओं में देरी को लेकर स्पष्टीकरण मांगा गया था। बेसरा के मुताबिक, लीड एजेंसी के प्रभारी के रूप में संयुक्त परिवहन आयुक्त कार्य करते हैं और वे निविदा निष्पादन समिति के अध्यक्ष भी होते हैं। फिलहाल इस पद पर नियमित पदस्थापन नहीं होने के कारण निविदा से जुड़े काम प्रभावित हुए। उन्होंने बताया कि पहले लीड एजेंसी-सड़क सुरक्षा कार्यालय में संयुक्त परिवहन आयुक्त, सड़क सुरक्षा, अवर सचिव, प्रशाखा पदाधिकारी और आईटी असिस्टेंट पदस्थापित थे। संयुक्त परिवहन आयुक्त के स्थानांतरण के बाद नियमित प्रतिस्थापन नहीं किया गया। वहीं, अवर सचिव 31 जुलाई 2026 को सेवानिवृत्त हुए और प्रतिनियुक्त प्रशाखा पदाधिकारी का भी 20 अगस्त 2026 से अन्यत्र स्थानांतरण हो गया। परिवहन आयुक्त कार्यालय की ओर से फरवरी और जुलाई 2026 में विभाग को मानवबल की कमी की स्थिति से अवगत कराने के लिए पत्राचार किए जाने की बात भी जवाब में कही गई है।
ITMS और इलेक्ट्रॉनिक एनफोर्समेंट का भी जिक्र
परिवहन आयुक्त ने अपने जवाब में Intelligent Traffic Management System (ITMS) और Electronic Enforcement जैसी सड़क सुरक्षा योजनाओं का भी उल्लेख किया है। उनके अनुसार, सुप्रीम कोर्ट और SCCoRS की ओर से आधुनिक तकनीक आधारित इन उपायों को प्रभावी बनाने पर जोर दिया गया है। इसके अलावा Automated Fitness Centre, LL/DL Smart Card समेत कई अन्य सार्वजनिक सेवाओं से जुड़े कार्य भी परिवहन विभाग और परिवहन आयुक्त कार्यालय के जिम्मे हैं। स्पष्टीकरण में कहा गया है कि सीमित मानवबल के बीच इन सभी योजनाओं और सेवाओं को समानांतर रूप से संचालित करने से उपलब्ध अधिकारियों और कर्मचारियों पर काम का दबाव बढ़ गया है। अब सचिव की ओर से मांगे गए स्पष्टीकरण और परिवहन आयुक्त के जवाब के बाद विभागीय स्तर पर आगे क्या कार्रवाई होती है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।



















