Samachar Post रिपोर्टर, रांची : विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर झारखंड में कांग्रेस और भाजपा के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस के 28 सितंबर के विरोध प्रदर्शन और निर्वाचन आयोग के कार्यालय के घेराव के बाद भाजपा ने इसे लेकर पलटवार किया है। झारखंड भाजपा के मुख्य प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने आरोप लगाया कि आयोग के खिलाफ प्रदर्शन संवैधानिक संस्था पर राजनीतिक दबाव बनाने का प्रयास है। कांग्रेस ने SIR और निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर राज्यभर में प्रदर्शन किया था।
प्रतुल शाहदेव ने कांग्रेस के पुराने रुख का किया जिक्र
प्रतुल शाहदेव ने कांग्रेस पर निर्वाचन आयोग को लेकर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एमएस गिल का उदाहरण देते हुए कहा कि उनके कार्यकाल के बाद वह कांग्रेस से राज्यसभा सदस्य बने और केंद्र सरकार में मंत्री भी रहे। राज्यसभा के आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार एमएस गिल 1996 से 2001 तक मुख्य चुनाव आयुक्त रहे और बाद में 2004 से 2016 तक राज्यसभा सदस्य रहे। उन्होंने केंद्र में मंत्री के रूप में भी जिम्मेदारी संभाली थी। भाजपा प्रवक्ता ने एन. गोपालस्वामी, नवीन चावला और टी.एन. शेषन से जुड़े पुराने घटनाक्रमों का भी उल्लेख करते हुए कांग्रेस पर निर्वाचन आयोग के साथ अपने पुराने व्यवहार को लेकर सवाल उठाए।
वर्तमान CEC को लेकर भाजपा ने रखा अपना पक्ष
प्रतुल शाहदेव ने कहा कि वर्तमान मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने फरवरी 2025 में पद संभाला था। निर्वाचन आयोग की आधिकारिक जानकारी के अनुसार ज्ञानेश कुमार ने 19 फरवरी 2025 को 26वें मुख्य चुनाव आयुक्त के रूप में कार्यभार ग्रहण किया। भाजपा प्रवक्ता ने इसी आधार पर 2014 और 2019 के लोकसभा चुनावों से जुड़े कांग्रेस के आरोपों को वर्तमान CEC के कार्यकाल से अलग बताया। हालांकि 2024 के लोकसभा चुनाव के समय भी ज्ञानेश कुमार मुख्य चुनाव आयुक्त नहीं थे; उस चुनाव के दौरान राजीव कुमार CEC थे। निर्वाचन आयोग के रिकॉर्ड में 2024 लोकसभा चुनाव के लिए राजीव कुमार के CEC होने की जानकारी दर्ज है।
SIR को लेकर दोनों पक्षों के अलग-अलग दावे
SIR को लेकर कांग्रेस लगातार मतदाता सूची और चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठा रही है। वहीं भाजपा निर्वाचन आयोग की प्रक्रिया का बचाव कर रही है और कांग्रेस के आरोपों को राजनीतिक विरोध का हिस्सा बता रही है। इस मुद्दे पर दोनों दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं। SIR की प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े वास्तविक मामलों का अंतिम आकलन संबंधित निर्वाचन अधिकारियों की जांच और निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के आधार पर होगा।

















