Samachar Post रिपोर्टर, रांची : झारखंड में प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (PMAY-G) के क्रियान्वयन को लेकर भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट में कई महत्वपूर्ण कमियां सामने आई हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, लाभुकों की सूची तैयार करने में देरी के कारण 6.32 लाख योग्य परिवार योजना के दायरे से बाहर रह गए, जबकि 2.90 लाख अपात्र लोगों को लाभुकों की सूची में शामिल कर लिया गया था। बाद में ग्राम सभाओं ने अपात्र लाभुकों के नाम सूची से हटाए। यह रिपोर्ट झारखंड विधानसभा के मानसून सत्र में पेश की गई है।
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छह जिलों की 60 पंचायतों में CAG ने की जांच
CAG ने योजना के ऑडिट के लिए झारखंड के छह जिलों बोकारो, दुमका, गिरिडीह, पलामू, रामगढ़ और सिमडेगा का चयन किया। इन जिलों के 12 प्रखंडों की 60 ग्राम पंचायतों में योजना से जुड़े दस्तावेजों और रिकॉर्ड की नमूना जांच की गई। रिपोर्ट के अनुसार, सामाजिक-आर्थिक जाति जनगणना (SECC)-2011 के आंकड़ों में झारखंड के 19.28 लाख परिवार बेघर या कच्चे अथवा जर्जर मकानों में रहने वाले पाए गए थे। इनमें से 14.88 लाख परिवार PMAY-G के निर्धारित मानकों के तहत अपात्र पाए गए।
2.90 लाख अपात्र लोगों को सूची में शामिल किया गया
CAG की दस्तावेजी जांच में सामने आया कि करीब 2.90 लाख ऐसे लोगों को PMAY-G की लाभुक सूची में शामिल किया गया, जो योजना का लाभ लेने के लिए पात्र नहीं थे। बाद में ग्राम सभाओं ने इन नामों को सूची से हटा दिया। ऑडिट के दौरान यह भी पाया गया कि जांच में शामिल 60 ग्राम पंचायतों में से किसी के पास स्थायी प्रतीक्षा सूची तैयार करने से जुड़े दस्तावेज उपलब्ध नहीं थे।
लाभुकों की सूची तैयार करने में हुई दो साल की देरी
CAG के अनुसार, वर्ष 2016 से नवंबर 2022 के बीच 22.34 लाख योग्य परिवारों की सूची तैयार की गई। हालांकि, इस सूची में भी कई तरह की त्रुटियां पाई गईं। रिपोर्ट में कहा गया है कि लाभुकों की सूची को अंतिम रूप देने में करीब दो साल की देरी हुई। इसके चलते 22.34 लाख योग्य परिवारों के मुकाबले केंद्र सरकार ने सिर्फ 16.02 लाख आवास ही आवंटित किए। इस तरह 6.32 लाख योग्य परिवार, यानी करीब 28 फीसदी लाभुक, योजना के दायरे से बाहर रह गए।
स्वीकृत आवासों में 98 फीसदी निर्माण पूरा
CAG रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2016 से 2024 के बीच केंद्र से आवंटित 16.02 लाख आवासों में से राज्य सरकार ने 15.92 लाख आवासों के निर्माण को मंजूरी दी। जनवरी 2025 तक इनमें से 15.62 लाख आवासों का निर्माण पूरा हो चुका था। इस लिहाज से स्वीकृत आवासों के निर्माण की उपलब्धि करीब 98 फीसदी रही। हालांकि, रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि जिन आवासों को एक साल में पूरा किया जाना था, उन्हें पूरा करने में अधिकतम तीन साल तक का समय लगा।

20,199 करोड़ रुपये उपलब्ध, खर्च हुए 14,113 करोड़
CAG ने PMAY-G के वित्तीय प्रबंधन में भी कमियां दर्ज की हैं। रिपोर्ट के अनुसार, योजना के लिए राज्य में कुल 20,199.98 करोड़ रुपये उपलब्ध थे। इनमें से राज्य सरकार ने 14,113.07 करोड़ रुपये ही खर्च किए। यानी उपलब्ध राशि का करीब 70 फीसदी ही इस्तेमाल हो सका। रिपोर्ट में कहा गया है कि 2019 से 2024 के दौरान केंद्र का हिस्सा स्टेट नोडल अकाउंट (SNA) में ट्रांसफर करने में भी देरी हुई। CAG के मुताबिक, केंद्र की राशि को SNA में ट्रांसफर करने में निर्धारित समय सीमा के मुकाबले अधिकतम 92 दिनों तक की देरी हुई। इस देरी के कारण राज्य सरकार पर ब्याज के रूप में 22.39 करोड़ रुपये की देनदारी बनी।
आवास निर्माण में बेहतर प्रदर्शन, लेकिन लाभुक चयन पर सवाल
CAG की रिपोर्ट से एक तरफ यह सामने आता है कि स्वीकृत आवासों के निर्माण में करीब 98 फीसदी की उपलब्धि रही, लेकिन दूसरी तरफ लाभुकों के चयन, स्थायी प्रतीक्षा सूची, वित्तीय प्रबंधन और केंद्र से मिली राशि को SNA में ट्रांसफर करने में गंभीर कमियां पाई गईं। रिपोर्ट में सामने आए आंकड़े बताते हैं कि योजना के क्रियान्वयन में सिर्फ आवास निर्माण ही नहीं, बल्कि पात्र लाभुकों तक योजना का लाभ पहुंचाने और वित्तीय प्रबंधन पर भी विशेष ध्यान देने की जरूरत है।

Reporter | Samachar Post

