झारखंड लोकायुक्त ने ढाई महीने में निपटाए 330 मामले, शिकायतों की संख्या तीन गुना बढ़ी

Meenu | July 14, 2026 | 10:31 AM IST

Samachar Post रिपोर्टर,रांची : करीब पांच वर्षों तक लोकायुक्त का पद खाली रहने के बाद 21 अप्रैल 2026 को जस्टिस अमिताभ कुमार गुप्ता ने झारखंड के लोकायुक्त के रूप में पदभार ग्रहण किया। पदभार संभालने के बाद से लोकायुक्त कार्यालय की कार्यप्रणाली में तेजी आई है। 10 जुलाई 2026 तक महज ढाई महीने के भीतर लगभग 330 लंबित मामलों का निष्पादन किया गया है।

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शिकायतों की संख्या तीन गुना बढ़ी

लोकायुक्त के पदभार ग्रहण करने के बाद भ्रष्टाचार से जुड़ी शिकायतों में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। 1 जनवरी से 20 अप्रैल 2026 तक केवल 63 शिकायतें दर्ज हुई थीं। 21 अप्रैल से 10 जुलाई 2026 के बीच 186 नई शिकायतें प्राप्त हुईं। इस तरह वर्ष 2026 में 10 जुलाई तक कुल 249 शिकायतें लोकायुक्त कार्यालय में दर्ज हो चुकी हैं। अधिकारियों के अनुसार, नई शिकायतों का पंजीकरण लगातार जारी है और सभी मामलों की सुनवाई नियमानुसार की जाएगी। लोकायुक्त कार्यालय में सचिव का पद भी करीब ढाई महीने तक रिक्त था। अब आभास वर्मा ने लोकायुक्त सचिव के रूप में योगदान दे दिया है। वे हजारीबाग से स्थानांतरित होकर इस पद पर नियुक्त किए गए हैं। उनके आने से प्रशासनिक कार्यों में भी गति आने की उम्मीद है।

अंचल कार्यालयों से जुड़ी शिकायतें सबसे अधिक

लोकायुक्त कार्यालय में सबसे अधिक शिकायतें अंचल कार्यालयों में कथित भ्रष्टाचार से संबंधित आती हैं। इसके अलावा निम्न प्रकार के मामलों की भी बड़ी संख्या में शिकायतें दर्ज होती हैं सरकारी गैर-मजरूआ और खास महाल भूमि की कथित अनियमित जमाबंदी, सरकारी जमीन को, दूसरे के नाम दर्ज करने के आरोप, वन भूमि पर कंपनियों द्वारा कथित अवैध कब्जा, अन्य सरकारी लोक सेवकों से जुड़े भ्रष्टाचार और अनियमितता के मामले है। इन सभी मामलों की जांच और सुनवाई लोकायुक्त के अधिकार क्षेत्र में की जाती है।

वर्षवार दर्ज शिकायतों का आंकड़ा

वर्षशिकायतों की संख्या
2021644
2022388
2023183
2024157
2025136
2026249 (10 जुलाई तक)


क्या संकेत देते हैं ये आंकड़े?

लोकायुक्त के पद पर नियुक्ति के बाद जहां लंबित मामलों के निस्तारण में तेजी आई है, वहीं शिकायतों की बढ़ती संख्या यह भी दर्शाती है कि लोग भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों में लोकायुक्त पर अधिक भरोसा जता रहे हैं। आने वाले समय में इन मामलों के निष्पादन की गति और प्रभावशीलता पर भी नजर रहेगी।

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