झारखंड हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: सेवानिवृत्त पारा शिक्षकों को मिलेगी पेंशन, संविदा सेवा भी जोड़ी जाएगी

Meenu | July 1, 2026 | 02:45 PM IST

Samachar Post रिपोर्टर, रांची :झारखंड हाईकोर्ट ने पारा शिक्षकों के पेंशन अधिकार को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने कहा है कि नियमित नियुक्ति से पहले संविदा (कॉन्ट्रैक्ट) पर दी गई सेवा को भी पेंशन योग्य सेवा माना जाएगा। जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने पांच सेवानिवृत्त इंटरमीडिएट प्रशिक्षित शिक्षकों की याचिका स्वीकार करते हुए राज्य सरकार को पेंशन, ग्रेच्युटी और अन्य सेवानिवृत्ति लाभ देने का निर्देश दिया है। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को आदेश दिया है कि याचिकाकर्ताओं की पारा शिक्षक अवधि को नियमित सेवा में जोड़कर सभी लाभों की पुनर्गणना की जाए। अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि आदेश प्राप्त होने के आठ सप्ताह के भीतर भुगतान किया जाए। साथ ही सेवानिवृत्ति की तिथि से वास्तविक भुगतान तक 6 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज भी दिया जाए।

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क्या था मामला?

याचिकाकर्ता माणिक चंद्र मंडल, उत्पल कुमार मुखर्जी, अब्दुल हमीद अंसारी, शिव नारायण गुप्ता और मोतीलाल टुडू पहले पारा शिक्षक के रूप में कार्यरत थे। बाद में चयन प्रक्रिया के जरिए उनकी नियमित इंटरमीडिएट प्रशिक्षित शिक्षक के रूप में नियुक्ति हुई। नियमित सेवा में उन्होंने लगभग नौ वर्ष या उससे अधिक समय तक कार्य किया और वर्ष 2025 में सेवानिवृत्त हुए। हालांकि, नियमित सरकारी सेवा 10 वर्ष से कुछ महीने कम होने के कारण उन्हें पेंशन का लाभ नहीं दिया गया। याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि उन्होंने पारा शिक्षक के रूप में 8 से 12 वर्षों तक लगातार सेवा दी थी। इसलिए उस अवधि को भी पेंशन योग्य सेवा में शामिल किया जाना चाहिए। वहीं राज्य सरकार ने अदालत में कहा कि पारा शिक्षक की सेवा संविदा आधारित थी, इसलिए उसे पेंशन के लिए मान्य नहीं माना जा सकता।

हाईकोर्ट ने सरकार की दलील खारिज की

अदालत ने राज्य सरकार की दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि सरकार खुद नियमित शिक्षक नियुक्ति में 50 प्रतिशत पद पारा शिक्षकों के लिए आरक्षित करती रही है। कोर्ट ने कहा कि जब नियुक्ति के समय पारा शिक्षक की सेवा को योग्यता माना गया, तो पेंशन के समय उसी सेवा को नकारना उचित नहीं है। अदालत ने टिप्पणी की कि सरकार एक आदर्श नियोक्ता होने के नाते दोहरा रवैया नहीं अपना सकती। पेंशन कोई दया नहीं, बल्कि कर्मचारी का वैधानिक अधिकार है।

सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का भी हवाला

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट के कई महत्वपूर्ण निर्णयों का उल्लेख किया। इनमें प्रेम सिंह बनाम उत्तर प्रदेश सरकार (2019), हिमाचल प्रदेश सरकार बनाम शीला देवी (2023) और एसडी जयप्रकाश बनाम भारत सरकार (2025) शामिल हैं। इन फैसलों में कहा गया है कि यदि संविदा सेवा के बाद नियमित नियुक्ति होती है, तो पूर्व की सेवा को पेंशन के लिए जोड़ा जा सकता है। माना जा रहा है कि हाईकोर्ट के इस फैसले का लाभ झारखंड के हजारों पारा शिक्षकों और संविदा कर्मियों को मिल सकता है, जो नियमित सेवा अवधि कम होने के कारण पेंशन से वंचित हैं।

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