पत्रकारों के हक में झारखंड HC का बड़ा फैसला, अधिकारी का बयान प्रकाशित करना रिपोर्टर का कर्तव्य; नहीं बनता आपराधिक केस

Samachar Post रिपोर्टर,रांची : झारखंड हाईकोर्ट ने पत्रकारिता की स्वतंत्रता और रिपोर्टिंग के अधिकार से जुड़े एक अहम मामले में महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि कोई पत्रकार किसी पुलिस अधिकारी के आधिकारिक बयान के आधार पर खबर प्रकाशित करता है और उसमें अपनी ओर से कोई झूठा या मनगढ़ंत तथ्य नहीं जोड़ता, तो केवल खबर प्रकाशित करने के आधार पर उसके खिलाफ आपराधिक मामला नहीं चलाया जा सकता। यह फैसला देवघर के वरिष्ठ पत्रकार विमलेन्दु नारायण की अपील पर सुनवाई के दौरान आया। अदालत ने मामले में कहा कि संबंधित व्यक्ति एक रिपोर्टर था, जिसने SDPO की ओर से कही गई बातों को ही समाचार के रूप में प्रकाशित किया था।

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अधिकारी के आधिकारिक बयान की रिपोर्टिंग पत्रकार का पेशेवर दायित्व

हाईकोर्ट ने माना कि किसी जिम्मेदार पुलिस अधिकारी की ओर से दिए गए आधिकारिक बयान को समाचार के माध्यम से जनता तक पहुंचाना पत्रकार के पेशेवर दायित्व का हिस्सा है। यदि रिपोर्टर ने अधिकारी के बयान को निष्पक्ष तरीके से प्रकाशित किया है, तो सिर्फ इस आधार पर उसे आपराधिक रूप से जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। अदालत के अनुसार, आधिकारिक बयान की रिपोर्टिंग और स्वयं कोई तथ्य गढ़कर प्रकाशित करने के बीच स्पष्ट अंतर है। पत्रकार ने यदि अपनी तरफ से कोई आपत्तिजनक, झूठा या भ्रामक तथ्य नहीं जोड़ा है, तो खबर प्रकाशित करना अपने आप में अपराध का आधार नहीं बन सकता।

मनगढ़ंत तथ्य जोड़ने पर ही स्थिति अलग हो सकती है

मामले में हाईकोर्ट ने यह भी देखा कि प्रकाशित खबर संबंधित SDPO के आधिकारिक बयान पर आधारित थी। रिपोर्टर ने अपनी ओर से कोई झूठी या मनगढ़ंत जानकारी नहीं जोड़ी थी। ऐसे में अदालत ने माना कि केवल अधिकारी के बयान को खबर के रूप में प्रकाशित करने के कारण रिपोर्टर के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही का आधार नहीं बनता। यह फैसला पत्रकारों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इसमें आधिकारिक बयानों की निष्पक्ष रिपोर्टिंग और पत्रकार की आपराधिक जवाबदेही के बीच अंतर को स्पष्ट किया गया है।

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