EOU पूछताछ में संजीव मुखिया की कथित भूमिका का खुलासा, NEET 2017 से BPSC TRE-3 तक पेपर लीक की जांच

Samachar Post रिपोर्टर, पटना : बिहार में पेपर लीक मामलों की जांच के दौरान आर्थिक अपराध इकाई (EOU) को संजीव मुखिया से पूछताछ में अहम जानकारी मिलने का दावा किया गया है। एजेंसी के अनुसार, पूछताछ के दौरान संजीव मुखिया ने NEET 2017, CSBC सिपाही भर्ती 2023 और BPSC शिक्षक भर्ती TRE-3 से जुड़े कथित पेपर लीक मामलों में अपनी भूमिका स्वीकार की है। हालांकि, किसी आरोपी का कथित कबूलनामा अपने आप में अपराध साबित नहीं करता। एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि इन मामलों में उसके साथ और कौन-कौन लोग जुड़े थे और कथित तौर पर प्रश्नपत्र अभ्यर्थियों तक किस तरीके से पहुंचाए गए।

तीन भर्ती परीक्षाओं में भूमिका की जांच

जानकारी के मुताबिक, EOU की पूछताछ में संजीव मुखिया से तीन अलग-अलग परीक्षा मामलों को लेकर जानकारी ली गई। इनमें NEET परीक्षा 2017, CSBC सिपाही भर्ती 2023 और BPSC शिक्षक भर्ती TRE-3 शामिल हैं। जांच एजेंसी कथित पेपर लीक के पूरे नेटवर्क की जानकारी जुटाने के साथ-साथ इसमें शामिल अन्य लोगों, संपर्कों और धन के लेन-देन से जुड़े पहलुओं की भी पड़ताल कर रही है।

पहले भी पेपर लीक मामलों में सामने आ चुका है नाम

संजीव मुखिया नालंदा जिले के नगरसौना का रहने वाला बताया जाता है। पेपर लीक और कथित सॉल्वर गैंग से जुड़े मामलों में उसका नाम पहले भी सामने आ चुका है। NEET-UG 2024 मामले में करीब 11 महीने बाद मई 2025 में उसकी गिरफ्तारी हुई थी। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के अनुसार उस मामले में CBI को उसके खिलाफ प्रश्नपत्र चोरी या लीक कराने का ठोस सबूत नहीं मिला था। अब EOU की पूछताछ में सामने आए कथित कबूलनामे के बाद पुराने मामलों में उसकी भूमिका की जांच फिर चर्चा में आ गई है।

EOU खंगाल रही कथित नेटवर्क और संपर्क

पूछताछ के दौरान मिली जानकारी के आधार पर EOU यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कथित पेपर लीक का नेटवर्क किस तरह काम करता था। एजेंसी यह भी जांच रही है कि प्रश्नपत्र परीक्षा से पहले किन लोगों तक पहुंचते थे और अभ्यर्थियों से संपर्क कैसे स्थापित किया जाता था। इसके साथ ही कथित नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों की भूमिका और संभावित वित्तीय लेन-देन की भी जांच की जा सकती है।

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दूसरे सबूतों से पुष्टि पर सामने आएगी पूरी तस्वीर

फिलहाल संजीव मुखिया की ओर से बताए गए कथित कबूलनामे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। EOU अब पूछताछ में सामने आई जानकारी को अन्य दस्तावेजों, तकनीकी साक्ष्यों और गवाहों के बयानों से मिलाने की कोशिश करेगी। जांच के दौरान यदि ये दावे अन्य साक्ष्यों से पुष्ट होते हैं, तो बिहार में पुराने और हालिया पेपर लीक मामलों के नेटवर्क को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी सामने आ सकती है।

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