Samachar Post रिपोर्टर, रांची : झारखंड सरकार माइंस एंड मिनरल्स (डेवलपमेंट एंड रेगुलेशन) संशोधन अधिनियम, 2026 (MMDR Amendment Act) को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की तैयारी कर रही है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने राज्य सरकार की ओर से शीर्ष अदालत जाने के फैसले को मंजूरी दे दी है। वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने भी अगस्त में कहा था कि राज्य सरकार संशोधित कानून के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाएगी। राज्य सरकार का कहना है कि संशोधित कानून से खनिजों पर सेस लगाने और उसकी वसूली से जुड़े उसके अधिकार प्रभावित होते हैं। सरकार ने इस मामले में 2024 के सुप्रीम कोर्ट के Mineral Area Development Authority फैसले को भी प्रमुख कानूनी आधारों में शामिल किया है।
2024 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले को बनाया आधार
Mineral Area Development Authority मामले में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि रॉयल्टी अपने आप में टैक्स नहीं है। फैसले में खनिज अधिकारों पर कराधान से जुड़े राज्यों के अधिकारों के दायरे पर महत्वपूर्ण कानूनी व्यवस्था दी गई थी। झारखंड सरकार का तर्क है कि इसी फैसले के आधार पर राज्य ने खनिजों पर सेस लगाने और उसकी वसूली की दिशा में कदम उठाए थे। राज्य सरकार अब संशोधित MMDR कानून के प्रावधानों को इस संवैधानिक और कानूनी पृष्ठभूमि में चुनौती देने की तैयारी कर रही है।
राज्य ने ₹14 हजार करोड़ संभावित राजस्व का दिया हवाला
झारखंड सरकार के अनुसार, खनिज सेस से वित्तीय वर्ष 2026-27 में करीब ₹14,000 करोड़ का राजस्व मिलने का अनुमान था। राज्य का कहना है कि संशोधित कानून लागू होने से इस संभावित राजस्व पर असर पड़ सकता है। वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने भी सार्वजनिक रूप से करीब ₹14,000 करोड़ के संभावित राजस्व नुकसान का मुद्दा उठाया है। उन्होंने कहा था कि राज्य सरकार सेस की वसूली जारी रखने और संशोधित कानून को अदालत में चुनौती देने की तैयारी कर रही है।
₹1.36 लाख करोड़ के बकाये का भी मामला
राज्य सरकार ने कोयला कंपनियों से जुड़े करीब ₹1,36,042 करोड़ के बकाये के दावे को भी इस विवाद से जोड़ा है। सरकार का कहना है कि संशोधित कानून से खनिज रॉयल्टी, भूमि राजस्व और अन्य मदों से जुड़े उसके पुराने दावों की कानूनी स्थिति प्रभावित हो सकती है। वित्त मंत्री ने भी इस राशि को लेकर केंद्र के साथ राज्य के विवाद का मुद्दा उठाया है। हालिया रिपोर्टों के अनुसार, राज्य सरकार MMDR संशोधन के खिलाफ कानूनी लड़ाई के साथ इस बकाये के दावे को भी आगे बढ़ाने की तैयारी में है।
राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद लागू हुआ संशोधन
MMDR संशोधन अधिनियम, 2026 को राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद यह कानून लागू हो चुका है। झारखंड सरकार अब इसके उन प्रावधानों को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की तैयारी कर रही है, जिनका असर राज्य के खनिजों से जुड़े कर और सेस लगाने के अधिकार पर पड़ने का राज्य का दावा है। राज्य सरकार की ओर से प्रस्तावित याचिका में संशोधित कानून और 2024 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बीच कानूनी संबंध तथा राज्यों के खनिज अधिकारों से जुड़े संवैधानिक प्रावधानों को आधार बनाए जाने की तैयारी है।
सुप्रीम कोर्ट में होगी कानूनी लड़ाई
झारखंड सरकार का कहना है कि खनिज संसाधनों से मिलने वाला राजस्व राज्य की वित्तीय व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है। इसी आधार पर राज्य संशोधित MMDR कानून के खिलाफ शीर्ष अदालत का रुख करने जा रहा है। अब प्रस्तावित याचिका दाखिल होने के बाद सुप्रीम कोर्ट के समक्ष यह मुद्दा आएगा कि संशोधित केंद्रीय कानून का राज्यों के खनिज अधिकारों और उनसे जुड़े कराधान अधिकारों पर क्या प्रभाव पड़ता है। मामले में अंतिम कानूनी स्थिति सुप्रीम कोर्ट के निर्णय से ही स्पष्ट होगी।




















