बजट सत्र में बालू घाट नीलामी पर हंगामा, नमन विक्सल कोंगाड़ी ने सरकार को घेरा

Meenu | February 24, 2026 | 01:16 PM IST

Samachar Post रिपोर्टर,रांची :झारखंड विधानसभा के बजट सत्र में बालू घाटों की नीलामी और श्रेणीकरण का मुद्दा गरमा गया। आदिवासी इलाकों में ग्राम सभा की अनदेखी के आरोपों को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस हुई।

आदिवासियों के हक पर डाका

कोलेबिरा से विधायक नमन विक्सल ने सदन में कहा कि बालू घाटों के मौजूदा नियम आदिवासी समुदाय के आर्थिक हितों के खिलाफ हैं। उनका आरोप था कि पेसा कानून के स्पष्ट प्रावधानों के बावजूद ग्राम सभाओं से अनुमति लिए बिना घाटों का श्रेणीकरण और नीलामी की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई। उन्होंने मांग की कि बालू घाटों से जुड़े कामों में स्थानीय आदिवासियों को प्राथमिकता दी जाए, ताकि बाहरी ठेकेदारों के बजाय क्षेत्र के लोगों को सीधा लाभ मिल सके। सरकार की ओर से मंत्री योगेंद्र महतो ने कहा कि वर्ष 2018 में बालू घाट लघु खनिज की श्रेणी में बिना विशेष वर्गीकरण के आते थे। उन्होंने बताया कि झारखंड नियमावली 2025 पूरी तरह प्रभावी है और अब ग्राम सभा की सहमति के बिना आवंटन आगे नहीं बढ़ेगा। मंत्री ने आश्वासन दिया कि नियमों का सख्ती से पालन कराया जाएगा।

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श्रेणी 1 और 2 खत्म करने की मांग

नमन विक्सल कोंगाड़ी ने सवाल उठाया कि क्या सरकार श्रेणी 1 और 2 को समाप्त करने पर विचार कर रही है। उनका कहना था कि टेंडर की शर्तें ऐसी हैं, जिन्हें अनुसूचित समुदाय के लोग तकनीकी और आर्थिक रूप से पूरा नहीं कर पाते। इसका परिणाम यह होता है कि घाटों की नीलामी में बाहरी लोग सफल हो जाते हैं, जबकि स्थानीय आदिवासी पीछे रह जाते हैं।

सदन में बढ़ी सियासी गर्मी

बालू घाटों की नीलामी और ग्राम सभा की भूमिका को लेकर सदन में लंबी बहस हुई। आदिवासी हितों की रक्षा बनाम राजस्व नीति के सवाल पर यह मुद्दा बजट सत्र का बड़ा राजनीतिक विषय बन गया है। आने वाले दिनों में सरकार इस पर क्या ठोस कदम उठाती है, इस पर सभी की नजर रहेगी।

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