Samachar Post डेस्क, रांची : बिहार और झारखंड के 150 से अधिक लोगों की विदेशों में मौजूद संपत्ति और बैंक खातों को लेकर आयकर विभाग की जांच शुरू होने की खबर है। एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, संबंधित देशों से मिले आधिकारिक वित्तीय इनपुट में इन लोगों से जुड़ी 250 करोड़ रुपये से अधिक की विदेशी संपत्ति या निवेश की जानकारी सामने आई है। इनमें झारखंड के करीब 80 और बिहार के करीब 70 लोग बताए गए हैं। मामले की जांच पटना स्थित विदेशी संपत्ति जांच इकाई (FAIU) से जुड़े स्तर पर किए जाने की बात रिपोर्ट में कही गई है। रिपोर्ट के अनुसार, जांच के दायरे में आए लोगों के बारे में आशंका है कि उन्होंने आयकर रिटर्न दाखिल करते समय विदेश में मौजूद कुछ संपत्तियों या वित्तीय खातों की जानकारी नहीं दी। हालांकि, जांच पूरी होने से पहले इसे कर चोरी या अघोषित संपत्ति का अंतिम निष्कर्ष नहीं माना जा सकता।
पटना, रांची से लेकर छोटे शहरों के लोगों के नाम
बताया गया है कि सूची में पटना, रांची और जमशेदपुर जैसे शहरों के साथ-साथ हाजीपुर, सिवान, गया, बेगूसराय, बक्सर, मुजफ्फरपुर, भागलपुर और धनबाद के लोगों के नाम भी शामिल हैं। जांच में जर्मनी, फ्रांस, ब्रिटेन, मलेशिया, ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका, कनाडा, यूएई, सिंगापुर और रूस समेत कई देशों में बैंक खातों और अन्य वित्तीय हितों से संबंधित जानकारी मिलने का दावा किया गया है।

विदेशी संपत्ति की जानकारी ITR में देना जरूरी
आयकर विभाग के अनुसार, भारत के निवासी करदाताओं को लागू नियमों के तहत विदेशी बैंक खाते, विदेशी वित्तीय हित, विदेश में अचल संपत्ति और अन्य विदेशी परिसंपत्तियों का विवरण ITR की Schedule FA में देना होता है। आयकर विभाग के मौजूदा निर्देशों में विदेशी परिसंपत्तियों और खातों के विभिन्न वर्गों का विवरण मांगा जाता है। विदेशी वित्तीय जानकारी की निगरानी के लिए भारत को CRS/AEOI जैसी अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के तहत दूसरे देशों से वित्तीय खातों से संबंधित सूचनाएं मिलती हैं। OECD के रिकॉर्ड में भारत के लिए कई देशों के साथ ऐसे स्वचालित सूचना-विनिमय संबंध दर्ज हैं।
ई-समन के जरिए मांगी जा रही जानकारी
रिपोर्ट के मुताबिक, जांच के दायरे में आए लोगों को ई-मेल के जरिए ई-समन भेजकर विदेशी संपत्ति और बैंक खातों को लेकर जानकारी मांगी गई है। उनसे विदेश में मौजूद संपत्ति और खातों का विवरण, निवेश के स्रोत, आय की स्थिति, विदेश में रहने वाले परिजनों या रिश्तेदारों की जानकारी और संबंधित देशों की यात्रा से जुड़े सवाल पूछे गए हैं। जांच एजेंसी के सामने मुख्य सवाल यह है कि विदेश में मौजूद संपत्ति या वित्तीय निवेश का स्रोत क्या था और उसका खुलासा संबंधित आयकर रिटर्न में क्यों नहीं किया गया।
अघोषित विदेशी संपत्ति पर कड़े प्रावधान
ब्लैक मनी कानून के तहत अघोषित विदेशी आय या संपत्ति पर 30 प्रतिशत टैक्स और टैक्स की राशि के बराबर तीन गुना तक यानी प्रभावी रूप से 90 प्रतिशत तक जुर्माना लगाया जा सकता है। कानून में जानबूझकर कर चोरी से जुड़े मामलों में 10 साल तक की सजा का भी प्रावधान है। हालांकि, किसी व्यक्ति पर ये प्रावधान तभी लागू होंगे जब संबंधित जांच और कानूनी प्रक्रिया में उसके खिलाफ अघोषित विदेशी आय या संपत्ति से जुड़े आरोप स्थापित हों।
जवाब संतोषजनक नहीं होने पर आगे बढ़ सकती है कार्रवाई
जांच में शामिल लोगों के जवाब और दस्तावेजों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी। विदेशी संपत्ति की जानकारी छिपाने या निवेश के स्रोत को लेकर संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं मिलने की स्थिति में आयकर विभाग कानून के तहत आगे की जांच और कार्रवाई कर सकता है। इस बीच, केंद्र सरकार ने 2026 में Foreign Assets of Small Taxpayers Disclosure Scheme भी शुरू की है, जिसके तहत पात्र करदाताओं को कुछ अघोषित विदेशी संपत्तियों या आय की घोषणा के लिए निर्धारित अवधि में अवसर दिया गया है।




















