Samachar Post रिपोर्टर, जामताड़ा : अवैध बालू खनन और परिवहन पर रोक लगाने के लिए जिला प्रशासन की सख्ती के बावजूद नाला और कर्माटांड़ इलाके में बालू ढुलाई को लेकर शिकायतें सामने आई हैं। स्थानीय सूत्रों का दावा है कि नाला थाना क्षेत्र के पाथरघट्टा से अजय नदी का बालू रोजाना बड़ी संख्या में वाहनों के जरिए दूसरे जिलों और पश्चिम बंगाल के विभिन्न इलाकों में भेजा जा रहा है।
पाथरघट्टा से रोजाना 50-60 वाहनों में बालू ढुलाई का दावा
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, पाथरघट्टा से प्रतिदिन करीब 50 से 60 वाहनों में बालू लोड किया जाता है। दावा है कि बालू बरहमपुर, वीरभूम, मालदा और पाकुड़ की ओर भेजी जाती है। कुछ वाहनों के आसनसोल और दुमका के रास्ते पश्चिम बंगाल के लोहापुर चेकपोस्ट तक पहुंचने की भी बात कही जा रही है। सूत्रों का कहना है कि शाम के समय कई वाहन दयानंद होटल के पीछे खड़े रहते हैं। इसके बाद रात में पाथरघट्टा से बालू लोड कर अलग-अलग रास्तों से वाहनों को रवाना किए जाने का दावा किया गया है।
सकलपुर में ट्रैक्टर से बालू सप्लाई का आरोप
स्थानीय सूत्रों ने काशिम, लम्बू और राजेश नामक लोगों पर कथित रूप से बालू लदे वाहनों के संचालन की व्यवस्था संभालने का आरोप लगाया है। दावा है कि वाहनों में बालू लोड कराने से लेकर उन्हें गंतव्य तक भेजने की व्यवस्था इनके स्तर से की जाती है।स्थानीय स्तर पर कुछ प्रभावशाली लोगों का संरक्षण मिलने की चर्चा भी है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
कर्माटांड़ में रोजाना 70-80 ट्रैक्टर चलने का दावा
कर्माटांड़ थाना क्षेत्र में भी बालू लदे ट्रैक्टरों के परिचालन की शिकायत सामने आई है। स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, आलमपुर-कर्माटांड़ मिशन मार्ग से करीब 30 ट्रैक्टर प्रतिदिन गुजरते हैं। वहीं मदनकट्टा, कालाझरिया और सकलपुर के रास्ते करीब 40 ट्रैक्टर चलने का दावा किया जा रहा है। इस तरह इन मार्गों पर रोजाना करीब 70 से 80 ट्रैक्टरों के परिचालन की बात कही जा रही है। कुछ ट्रैक्टर चालकों के हवाले से थाना स्तर पर प्रति ट्रैक्टर कथित रूप से राशि लिए जाने का आरोप भी लगाया गया है। इस दावे की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
डीसी की बैठक के अगले दिन फिर उठे सवाल
बुधवार को उपायुक्त आलोक कुमार की अध्यक्षता में जिला टास्क फोर्स की बैठक हुई थी। इसमें थाना प्रभारियों और अंचल अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में अवैध खनन और खनिज परिवहन के खिलाफ कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया था। बैठक में एनजीटी के नियमों का पालन सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया था। इसके अगले ही दिन बालू लदे वाहनों और ट्रैक्टरों के परिचालन की शिकायत सामने आने से प्रशासनिक निगरानी को लेकर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि शिकायतें सही पाई जाती हैं तो बालू के स्रोत, परिवहन मार्ग और इसके पीछे काम कर रहे पूरे नेटवर्क की जांच की जानी चाहिए।स्थानीय स्तर पर कुछ लोगों के खिलाफ लंबे समय से अवैध खनन और परिवहन में संलिप्तता के आरोप लगाए जाने की भी चर्चा है। हालांकि इन आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकती है।





















