Samachar Post रिपोर्टर, पटना : बिहार बंद के दौरान दर्ज की गई एक प्राथमिकी (FIR) को लेकर नया विवाद सामने आया है। एक युवक ने दावा किया है कि वह पिछले चार महीनों से रूस में रह रहा है, इसके बावजूद उसका नाम बिहार बंद के दौरान दर्ज मामले में शामिल किया गया है। युवक ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर रखी अपनी बात
युवक ने रूस से एक वीडियो साझा करते हुए कहा कि एनईईटी पेपर लीक मामले को लेकर हुए प्रदर्शन के संबंध में दर्ज प्राथमिकी में उसका नाम शामिल किया गया है। उसने दावा किया कि वह पिछले चार महीनों से रूस में रह रहा है और प्रदर्शन के समय घटनास्थल पर मौजूद नहीं था। वीडियो में युवक ने कहा कि जिस दिन प्रदर्शन हुआ, उस दौरान वह भारत में भी नहीं था। ऐसे में उसका नाम प्राथमिकी में शामिल होना कई सवाल खड़े करता है।

निष्पक्ष जांच और FIR की समीक्षा की मांग
युवक ने प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कराने और प्राथमिकी की दोबारा समीक्षा करने की मांग की है। उसका कहना है कि बिना पर्याप्त सत्यापन और जांच के उसका नाम केस में जोड़ दिया गया है, जिससे उसे मानसिक और सामाजिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उसने संबंधित अधिकारियों से तथ्यों के आधार पर कार्रवाई करने और मामले की सच्चाई सामने लाने की अपील की है।
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प्रशासन की प्रतिक्रिया का इंतजार
फिलहाल इस पूरे मामले को लेकर जिला प्रशासन या पुलिस की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। प्रशासनिक पक्ष सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि प्राथमिकी में युवक का नाम किन परिस्थितियों में शामिल किया गया और जांच की वर्तमान स्थिति क्या है। मामले को लेकर सोशल मीडिया पर भी चर्चा तेज हो गई है और लोग प्रशासनिक प्रक्रिया तथा जांच की पारदर्शिता को लेकर सवाल उठा रहे हैं।

Reporter | Samachar Post
मैंने सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ झारखंड से पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री ली है। पत्रकारिता के क्षेत्र में बतौर रिपोर्टर मेरा अनुभव फिलहाल एक साल से कम है। सामाचार पोस्ट मीडिया के साथ जुड़कर स्टाफ रिपोर्टर के रूप में काम कर रही हूं।

