- मतदाताओं तक समय पर नहीं पहुंच रहे फॉर्म, प्रशिक्षण और समन्वय की कमी को लेकर बढ़ी चिंता
Samachar Post रिपोर्टर, हजारीबाग : हजारीबाग शहर में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान की प्रगति अपेक्षा के अनुरूप नहीं दिख रही है। कई वार्डों में मतदाताओं तक समय पर फॉर्म नहीं पहुंचने, प्रक्रिया की पर्याप्त जानकारी नहीं मिलने और ऑनलाइन अपलोडिंग से जुड़ी तकनीकी समस्याओं के कारण लोगों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय स्तर पर नगर निगम की व्यवस्था और बीएलओ (बूथ लेवल ऑफिसर) की नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।
क्षेत्र से अपरिचित बीएलओ की नियुक्ति पर सवाल
स्थानीय लोगों का कहना है कि कई वार्डों में ऐसे कर्मचारियों को बीएलओ बनाया गया है, जिनका संबंधित क्षेत्र से सीधा परिचय नहीं है। इससे घर-घर जाकर मतदाताओं की पहचान करना, फॉर्म वितरित करना और सही जानकारी जुटाना चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है। लोगों का मानना है कि स्थानीय क्षेत्र की जानकारी रखने वाले कर्मियों की तैनाती से अभियान अधिक प्रभावी ढंग से संचालित किया जा सकता था।
साहिया और आंगनबाड़ी कर्मियों पर बढ़ा अतिरिक्त दबाव
अभियान के तहत कई स्थानों पर साहिया, आंगनबाड़ी सेविका, सहायिका और साक्षरता कर्मियों को भी बीएलओ की जिम्मेदारी दी गई है। आरोप है कि इनमें से कई कर्मियों को एसआईआर प्रक्रिया और डिजिटल प्रणाली की पूरी जानकारी नहीं है। बताया जा रहा है कि कई मामलों में फॉर्म भरने और ऑनलाइन अपलोड करने का कार्य परिवार के अन्य सदस्य कर रहे हैं। वहीं इन कर्मियों पर पहले से कई सरकारी योजनाओं की जिम्मेदारियां भी हैं, जिससे कार्यभार और बढ़ गया है।
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शिक्षकों को स्वयंसेवक के रूप में लिया जा रहा सहयोग
जानकारी के अनुसार अभियान की गति बढ़ाने के लिए कई शिक्षकों को बीएलओ के साथ स्वयंसेवक के रूप में लगाया गया है। अवकाश के दिनों में भी शिक्षक घर-घर जाकर लोगों की मदद कर रहे हैं। हालांकि, अतिरिक्त जिम्मेदारी के बावजूद उन्हें अलग से कोई पारिश्रमिक नहीं मिलने की चर्चा है। कई मतदाताओं ने शिकायत की है कि उन्हें केवल फॉर्म उपलब्ध करा दिए गए, लेकिन उन्हें सही तरीके से भरने की पूरी जानकारी नहीं दी गई। परिणामस्वरूप फॉर्म जमा करने के दौरान त्रुटियां सामने आ रही हैं और लोगों को बार-बार सुधार के लिए चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
डिजिटल प्रक्रिया भी बनी चुनौती
एसआईआर अभियान में मोबाइल ऐप के माध्यम से डेटा अपलोड और सत्यापन की व्यवस्था की गई है। ऐसे में जिन बीएलओ के पास पर्याप्त तकनीकी संसाधन नहीं हैं या जिन्हें डिजिटल प्रशिक्षण सीमित मिला है, उन्हें कार्य निष्पादन में कठिनाई हो रही है। कई क्षेत्रों में डेटा अपलोडिंग और सत्यापन की प्रक्रिया धीमी बताई जा रही है।
प्रशिक्षण और तकनीकी सहायता बढ़ाने की मांग
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि अभियान को सफल और समयबद्ध बनाने के लिए बीएलओ को बेहतर प्रशिक्षण, तकनीकी सहयोग और आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराना जरूरी है। साथ ही स्थानीय स्तर की जानकारी रखने वाले कर्मियों की तैनाती से मतदाताओं तक पहुंच आसान होगी और पुनरीक्षण कार्य की गुणवत्ता भी बेहतर होगी। मतदाताओं का मानना है कि विशेष गहन पुनरीक्षण जैसे महत्वपूर्ण अभियान में स्पष्ट मार्गदर्शन, प्रशिक्षित कर्मी और मजबूत समन्वय सुनिश्चित किया जाना चाहिए, ताकि मतदाता सूची का अद्यतन कार्य बिना किसी भ्रम और परेशानी के समय पर पूरा हो सके।

Reporter | Samachar Post
मैंने सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ झारखंड से पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री ली है। पत्रकारिता के क्षेत्र में बतौर रिपोर्टर मेरा अनुभव फिलहाल एक साल से कम है। सामाचार पोस्ट मीडिया के साथ जुड़कर स्टाफ रिपोर्टर के रूप में काम कर रही हूं।


