95% से कम रिजल्ट पर कार्रवाई : हजारीबाग के 59 स्कूलों के प्राचार्य और शिक्षकों का वेतन रोका

Rupa Kumari | May 18, 2026 | 10:50 AM IST

Samachar Post रिपोर्टर, हजारीबाग : झारखंड एकेडमिक काउंसिल (जैक) की मैट्रिक परीक्षा में खराब प्रदर्शन को लेकर हजारीबाग जिले के 59 हाई स्कूलों पर बड़ी कार्रवाई की गई है। जिला शिक्षा पदाधिकारी प्रवीण रंजन ने संबंधित स्कूलों के प्राचार्यों और शिक्षकों का वेतन तत्काल प्रभाव से रोक दिया है। साथ ही सभी से एक सप्ताह के भीतर स्पष्टीकरण मांगा गया है। इस वर्ष मैट्रिक परीक्षा परिणाम में हजारीबाग जिला राज्यभर में 14वें स्थान पर रहा, जबकि पिछले साल जिला सातवें स्थान पर था। रैंकिंग में आई गिरावट को शिक्षा विभाग ने गंभीरता से लेते हुए जवाबदेही तय करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

कई प्रमुख स्कूलों को जारी हुआ नोटिस

कार्रवाई की जद में आए स्कूलों में पीएमश्री केबी हाई स्कूल, हिंदू प्लस टू स्कूल हजारीबाग, केएन प्लस टू स्कूल इचाक, राम नारायण प्लस टू स्कूल पदमा और देवकुली, सलगावां, पबरा, सरौनी व ढौठवा के पीएमश्री स्कूल शामिल हैं। डीईओ प्रवीण रंजन ने कहा कि इन स्कूलों में पर्याप्त संख्या में शिक्षक उपलब्ध हैं। कई जगह एक ही विषय के दो-दो शिक्षक पदस्थापित हैं, इसके बावजूद परीक्षा परिणाम संतोषजनक नहीं रहे। विशेष रूप से गणित, अंग्रेजी और विज्ञान विषयों में बड़ी संख्या में छात्र असफल हुए, जिससे ओवरऑल रिजल्ट प्रभावित हुआ।

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आज होगी मैट्रिक और इंटर रिजल्ट की समीक्षा

स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के सचिव उमाशंकर सिंह सोमवार को मैट्रिक और इंटरमीडिएट परीक्षा परिणाम की समीक्षा करेंगे। विभागीय स्तर पर खराब प्रदर्शन करने वाले स्कूलों और शिक्षकों के खिलाफ आगे की कार्रवाई पर चर्चा होगी। जानकारी के अनुसार कई जिलों में डीसी और डीईओ द्वारा पहले ही शोकॉज नोटिस जारी किए जा चुके हैं। जरूरत पड़ने पर वेतन रोकने सहित अन्य विभागीय कार्रवाई भी की जा सकती है।

शिक्षकों ने बताईं खराब रिजल्ट की वजहें

हिंदू प्लस टू स्कूल हजारीबाग के शिक्षकों ने खराब परिणाम के पीछे कई व्यावहारिक समस्याएं गिनाईं। उनका कहना है कि आठवीं पास करने वाले कमजोर विद्यार्थियों को भी नौवीं में नामांकन देना पड़ता है ताकि इनरोलमेंट बढ़ सके। ऐसे कई छात्र बुनियादी लेखन तक सही ढंग से नहीं कर पाते। शिक्षकों ने यह भी कहा कि नौवीं कक्षा में सेंटअप टेस्ट बंद होने से छात्रों की शैक्षणिक तैयारी का सही मूल्यांकन नहीं हो पाता और विद्यार्थी सीधे मैट्रिक परीक्षा में शामिल हो जाते हैं। इसके अलावा चुनाव ड्यूटी, ट्रेनिंग, सावित्री बाई फुले योजना, बैंक खाता खुलवाने, आय प्रमाण पत्र और जनगणना जैसे गैर शैक्षणिक कार्यों का बोझ भी पढ़ाई को प्रभावित कर रहा है।

शिक्षक संघ ने उठाई अहम मांग

झारखंड राज्य माध्यमिक शिक्षक संघ के सचिव रविंद्र कुमार चौधरी ने स्कूलों में फिर से सेंटअप टेस्ट शुरू करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि शिक्षकों को गैर शैक्षणिक कार्यों से अलग रखा जाए ताकि वे विद्यार्थियों की पढ़ाई पर पूरा ध्यान दे सकें।

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