Samachar Post रिपोर्टर,घाटशिला :स्वर्णरेखा नदी के किनारे स्थित पर्यटन नगरी घाटशिला में लाखों रुपये खर्च होने के बावजूद स्वच्छता व्यवस्था बदहाल बनी हुई है। शहर के कई हिस्सों में नालियां जाम हैं, सड़कों पर जलजमाव की समस्या आम हो गई है और जगह-जगह कचरे के ढेर से लोग परेशान हैं। बारिश के मौसम में हालात और भी खराब हो जाते हैं। करीब 50 हजार की आबादी वाले इस शहर के साथ-साथ आसपास के धरमबहाल, काशिदा, गोपालपुर और पावड़ा पंचायत के दर्जनों गांवों के लोग भी इस बदहाल व्यवस्था से प्रभावित हैं।
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जाम नालियों से सड़क पर बह रहा पानी
शहर के अधिकतर इलाकों में नालियों की नियमित सफाई नहीं होने के कारण उनमें कचरा जमा है। बारिश होते ही नालियां ओवरफ्लो होकर पानी सड़कों पर बहाने लगती हैं, जिससे लोगों को आवागमन में भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। फूलडूंगरी स्थित पुरानी तहसील कचहरी, कॉलेज रोड, गोपालपुर राम मंदिर के पास और काशिदा मुख्य सड़क के किनारे कचरे के ढेर साफ नजर आते हैं। वहीं गोपालपुर हाथीजोबड़ा पुल से राज स्टेट तक और यूबीआई मोड़ से अमाईनगर नदी घाट जाने वाली सड़क पर भी जलजमाव और टूटी नालियों की समस्या बनी हुई है, जिससे स्कूली बच्चों और स्थानीय लोगों को दिक्कत होती है।
‘क्लीन घाटशिला, ग्रीन घाटशिला’ अभियान भी बेअसर
वर्ष 2007-08 में शुरू किया गया ‘क्लीन घाटशिला, ग्रीन घाटशिला’ अभियान शुरुआती वर्षों में प्रभावी रहा, लेकिन समय के साथ इसकी रफ्तार धीमी पड़ गई। बाद के वर्षों में चलाए गए स्वच्छता अभियान भी लंबे समय तक प्रभावी नहीं रह सके, जिससे शहर की स्थिति फिर से बिगड़ गई। रूर्बन मिशन के तहत कचरा संग्रह केंद्र, ट्रॉली और डस्टबिन जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं, लेकिन कचरा निष्पादन की व्यवस्था अब तक पूरी तरह शुरू नहीं हो सकी है। काशिदा पंचायत के तामुकपाल में कचरा निष्पादन केंद्र का भवन तो तैयार है, लेकिन मशीन नहीं लगने के कारण यह केंद्र अब तक चालू नहीं हो पाया है, जिससे ठोस कचरा प्रबंधन योजना अधूरी पड़ी है।

स्थानीय लोगों ने उठाई स्थायी समाधान की मांग
स्थानीय निवासियों का कहना है कि हर साल स्वच्छता पर लाखों रुपये खर्च किए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर सुधार नजर नहीं आता। लोगों ने नियमित नाला सफाई, समय पर कचरा उठाव और ठोस कचरा निष्पादन व्यवस्था को प्रभावी बनाने की मांग की है। विभिन्न पंचायत प्रतिनिधियों ने माना कि स्वच्छता व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए प्रशासन के साथ-साथ आम लोगों, स्कूलों, व्यापारियों और सामाजिक संगठनों की भागीदारी जरूरी है। उन्होंने कहा कि जनभागीदारी के बिना ‘स्वच्छ घाटशिला’ का लक्ष्य पूरा नहीं हो सकता।
विधायक ने दिया समाधान का आश्वासन
घाटशिला विधायक सोमेश चंद्र सोरेन ने कहा कि कचरा निष्पादन केंद्रों में मशीन लगाने के लिए जिला प्रशासन से बातचीत की जाएगी। उन्होंने कहा कि स्वच्छ घाटशिला तभी संभव है जब प्रशासन और जनता मिलकर जिम्मेदारी निभाएं।

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