Samachar Post रिपोर्टर,रांची :झारखंड के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर के रांची स्थित आवास पर रविवार को उस समय हलचल बढ़ गई जब छत्तरपुर और पलामू क्षेत्र से बड़ी संख्या में समर्थक वहां पहुंच गए। समर्थकों ने मंत्री की सुरक्षा को लेकर चिंता जताते हुए कहा कि वे उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी लेने को तैयार हैं। दिनभर मंत्री आवास पर कार्यकर्ताओं और समर्थकों की आवाजाही बनी रही, जबकि देर शाम तक कई लोग वहां मौजूद रहे। भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने कुछ लोगों को अलग-अलग गेस्ट हाउस में ठहराने की व्यवस्था भी की।
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समर्थकों ने जताई सुरक्षा को लेकर चिंता
समर्थकों का कहना है कि मीडिया में आई खबरों के बाद वे मंत्री से मिलने पहुंचे हैं। उनका दावा है कि क्षेत्र में कानून-व्यवस्था की स्थिति और पहले की उग्रवादी पृष्ठभूमि को देखते हुए मंत्री की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। समर्थकों ने कहा कि वे अपने जनप्रतिनिधि की सुरक्षा के लिए हर समय तैयार हैं और आवश्यकता पड़ने पर उनके साथ खड़े रहेंगे।

मंत्री ने समर्थकों को लौटाया, सुरक्षा व्यवस्था पर दिया निर्देश
हालांकि, देर शाम वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने सभी समर्थकों को वापस भेज दिया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि सरकारी कार्यक्रमों और कार्यों में किसी प्रकार की अनावश्यक भीड़ की आवश्यकता नहीं है। इधर, मंत्री के आवास पर तैनात स्पेशल ब्रांच और जैप के जवान सुरक्षा व्यवस्था संभालते हुए दूर से ही गतिविधियों पर नजर बनाए हुए हैं। रविवार को वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर बिना विशेष सुरक्षा के ही महानगर कांग्रेस के एक कार्यक्रम में शामिल हुए। इसके बाद वे एचईसी क्षेत्र स्थित पारस अस्पताल भी पहुंचे। इस दौरान सुरक्षा कर्मी दूर से ही उनकी गतिविधियों पर नजर रखते रहे।
अधिकारियों को नोटिस और जांच के आदेश
इस पूरे विवाद के बीच वित्त मंत्री ने 4 जुलाई को वित्त सचिव को पत्र लिखकर विभागीय कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने पूछा है कि एक संयुक्त सचिव द्वारा उन्हें गाड़ी लौटाने का नोटिस किस अधिकार और प्रावधान के तहत भेजा गया। मंत्री ने मामले की जांच के आदेश देते हुए 10 दिनों के भीतर रिपोर्ट मांगी है और संबंधित अधिकारी पर कार्रवाई की भी मांग की है।

‘सिस्टम को जवाबदेह बना रहा हूं’- मंत्री
राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि उनका उद्देश्य सरकार के खिलाफ नहीं, बल्कि सिस्टम को अधिक जवाबदेह बनाना है। उन्होंने कहा कि अधिकारी अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर काम नहीं कर सकते। मंत्री ने यह भी कहा कि यदि पुलिस मुख्यालय या किसी सक्षम प्राधिकारी का आदेश था, तो उसे सार्वजनिक किया जाना चाहिए। उन्होंने व्यवस्था में पारदर्शिता और राजकीय गरिमा बनाए रखने पर जोर दिया।

















