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जामताड़ा जिला परिषद में घमासान: अध्यक्ष, DDC और कार्यपालक पदाधिकारी आमने-सामने

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Samachar Post रिपोर्टर,जामताड़ा :जामताड़ा जिला परिषद में पिछले कई महीनों से टकराव थमने का नाम नहीं ले रहा है। अध्यक्ष राधा रानी सोरेन, उप विकास आयुक्त (DDC) निरंजन कुमार और परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी के बीच अधिकार, प्रक्रिया और पारदर्शिता को लेकर विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है।

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FIR दर्ज न होने पर भड़कीं अध्यक्ष

अध्यक्ष राधा रानी सोरेन ने जिला परिषद में हुई कथित गड़बड़ी के मामले में DDC के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने शिकायत दर्ज नहीं की। इससे नाराज होकर उन्होंने SP और DC को लिखित शिकायत दी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। अध्यक्ष का आरोप है कि DDC ने बंदोबस्ती प्रक्रिया में अनियमितता की,परिषद के कुछ कर्मचारियों के साथ मिलीभगत कर निर्णय लिए गए और बिना प्रक्रिया पूरी किए नियुक्ति और कार्य निष्पादन किए गए।करमदाहा मेला की बंदोबस्ती बनी विवाद की जड़ पूरे विवाद की शुरुआत है। मकर संक्रांति के करमदाहा मेला की बंदोबस्ती से मानी जा रही है। नीलामी में 59.01 लाख रुपये की उच्चतम बोली लगी, बोलीदाता इलियास अंसारी ने पूरी राशि जमा नहीं की, केवल 46.31 लाख जमा किए। इसके बावजूद उन्हें सैरात की बंदोबस्ती दे दी गई। DDC ने वर्क ऑर्डर में ‘पूरी राशि जमा’ होने का उल्लेख किया। इसके बाद DDC ने स्वयं जिला परिषद के कनीय अभियंता को सितंबर 2025 में इलियास अंसारी के खिलाफ FIR दर्ज कराने का निर्देश दिया। अध्यक्ष ने इस बंदोबस्ती गड़बड़ी में DDC, कर्मचारी दीपक कुमार वर्मा और लेखापाल सुबोध चंद्र टुडू के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का आवेदन दिया, लेकिन पुलिस ने केस दर्ज नहीं किया।

DDC vs कार्यपालक पदाधिकारी: फाइलों पर भी विवाद

जिला परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी का आरोप है कि योजनाओं और कामकाज से संबंधित फाइलें उन्हें बायपास कर सीधे DDC को भेजी जा रही हैं। वह पंचायत राज पदाधिकारी के पद पर तैनात हैं और 13 दिसंबर 2023 से जिला परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी की जिम्मेदारी भी संभाल रहे हैं। मार्च 2024 तक उन्हें कुछ फाइलें मिलती थीं, लेकिन योजनाओं से संबंधित जानकारी मांगे जाने के बाद फाइलें उनसे हटा ली गईं। दूसरी ओर DDC कहते हैं फाइलों का प्रबंधन और काम का बंटवारा उनका अधिकार है। कार्यपालक पदाधिकारी ने समन्वय समिति की बैठक में वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ शिकायत कर प्रोटोकॉल तोड़ा। इसीलिए उनसे जवाब तलब किया गया।

समन्वय समिति की बैठक में बढ़ा तनाव

जनवरी 2025 की बैठक में स्थिति और बिगड़ गई जिला अभियंता का कहना था कि योजनाओं की पूरी जानकारी कार्यपालक पदाधिकारी के पास होती है। कार्यपालक पदाधिकारी ने कहा कि उन्हें कोई जानकारी नहीं दी जाती है। DDC ने इसे प्रोटोकॉल का उल्लंघन बताते हुए लिखित जवाब मांगा है।

निचोड़: जिला परिषद में प्रशासनिक टकराव चरम पर

अध्यक्ष, DDC और कार्यपालक पदाधिकारी तीनों के अपने-अपने आरोप हैं। मेला बंदोबस्ती, फाइल प्रबंधन और प्रक्रिया पालन को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है, जबकि FIR और कार्रवाई पर अब तक कोई स्पष्ट निर्णय नहीं हुआ है। जिला परिषद का यह घमासान आने वाले समय में और तूल पकड़ सकता है।

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Meenu

Reporter  |  Samachar Post

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