दिशोम गुरु शिबू सोरेन की प्रथम पुण्यतिथि: संघर्ष, जनआंदोलन और झारखंड की पहचान के सूत्रधार को श्रद्धांजलि

Meenu | August 3, 2026 | 02:51 PM IST

Samachar Post रिपोर्टर,रांची : झारखंड आंदोलन के प्रमुख नेताओं में रहे पूर्व मुख्यमंत्री और दिशोम गुरु शिबू सोरेन की प्रथम पुण्यतिथि पर राज्यभर में उन्हें श्रद्धांजलि दी जा रही है। उनके पैतृक गांव नेमरा-लुकैयाटांड़ (रामगढ़) में विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इस अवसर पर बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधियों, राजनीतिक कार्यकर्ताओं और आम लोगों के शामिल होने की संभावना है। यह दिन समर्थकों के लिए केवल श्रद्धांजलि का अवसर ही नहीं, बल्कि झारखंड आंदोलन और उसके इतिहास को याद करने का भी अवसर माना जा रहा है।

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संघर्षों से उभरे जननेता

शिबू सोरेन का राजनीतिक और सामाजिक जीवन लंबे जनसंघर्षों से जुड़ा रहा। उन्होंने आदिवासियों, मूलवासियों, किसानों और वंचित वर्गों के अधिकारों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। उनके नेतृत्व में जल, जंगल और जमीन से जुड़े सवाल व्यापक जनआंदोलन का हिस्सा बने। समर्थकों के बीच उन्हें ‘दिशोम गुरु’ के नाम से पहचान मिली और वे झारखंड आंदोलन के प्रमुख चेहरों में शामिल रहे।

अलग झारखंड राज्य आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका

1970 और 1980 के दशक में अलग झारखंड राज्य की मांग को संगठित रूप देने में शिबू सोरेन की महत्वपूर्ण भूमिका रही। झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के माध्यम से उन्होंने आंदोलन को राजनीतिक दिशा दी। लंबे संघर्ष के बाद 15 नवंबर 2000 को झारखंड अलग राज्य के रूप में अस्तित्व में आया। शिबू सोरेन के समर्थक उन्हें इस ऐतिहासिक आंदोलन के प्रमुख सूत्रधारों में से एक मानते हैं।

नेमरा-लुकैयाटांड़ में प्रतिमा का अनावरण

प्रथम पुण्यतिथि के अवसर पर लुकैयाटांड़ स्थित सोना सोबरन स्कूल परिसर में शिबू सोरेन की आदमकद प्रतिमा का अनावरण किया जाना है। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, विधायक कल्पना सोरेन सहित कई जनप्रतिनिधियों और राजनीतिक नेताओं के शामिल होने की संभावना है। आयोजकों के अनुसार, इस अवसर पर श्रद्धांजलि सभा और अन्य कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे।

समर्थकों के लिए प्रेरणा का स्रोत

शिबू सोरेन को उनके समर्थक झारखंड की पहचान, सामाजिक न्याय और जनसंघर्ष का प्रतीक मानते हैं। उनके राजनीतिक जीवन, आंदोलनों और सामाजिक योगदान को याद करते हुए विभिन्न संगठनों द्वारा श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। प्रथम पुण्यतिथि के अवसर पर समर्थक उनके विचारों और जनसेवा की विरासत को आगे बढ़ाने का संकल्प भी दोहरा रहे हैं।

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