- झारखंड की ग्रामीण विकास मंत्री ने SIR को लेकर साधा निशाना, चुनाव आयोग ने सभी फैसलों पर तीनों आयुक्तों की सहमति का दावा किया
Samachar Post रिपोर्टर, रांची : झारखंड की ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि देश में संगठित तरीके से ‘वोट चोरी’ का खेल चल रहा है और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। उनका बयान ऐसे समय आया है, जब एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि चुनाव आयोग के दो आयुक्तों ने पिछले 10 महीनों में कई फैसलों को लेकर आपत्तियां दर्ज की थीं।
14 बार आपत्ति का दिया हवाला
दीपिका पांडेय सिंह ने कहा कि यदि चुनाव आयोग के भीतर ही मतदाता सूची और उसके प्रबंधन से जुड़े फैसलों पर बार-बार आपत्तियां दर्ज की गईं, तो इसे गंभीरता से देखा जाना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि पिछले 10 महीनों में 14 बार आपत्ति दर्ज की गई। दरअसल, द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार आयोग के स्तर पर लिए गए फैसलों पर आपत्ति दर्ज की। रिपोर्ट में मतदाता पंजीकरण, नाम हटाने और बहाल करने तथा चुनावी डेटा के प्रबंधन जैसे मुद्दों का उल्लेख है। मंत्री ने कहा कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने और चुनावी डेटा के केंद्रीकरण से जुड़े मुद्दे सिर्फ प्रशासनिक प्रक्रिया तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इनका सीधा संबंध मतदाताओं के अधिकार से है।
SIR को लेकर क्या है विवाद?
SIR का उद्देश्य मतदाता सूची को अपडेट करना और अपात्र, मृत, स्थानांतरित या डुप्लीकेट प्रविष्टियों की पहचान करना है। हालांकि, इस प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची से बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने और सत्यापन प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक दलों और अन्य पक्षों की ओर से सवाल उठाए गए हैं। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, दो चुनाव आयुक्तों ने मतदाता डेटा और आयोग की IT व्यवस्था के नियंत्रण के केंद्रीकरण समेत कई मुद्दों पर आपत्ति दर्ज की थी। दीपिका पांडेय सिंह ने आरोप लगाया कि इन घटनाक्रमों से चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में मतदाता सूची की प्रक्रिया पारदर्शी और भरोसेमंद होनी चाहिए।
चुनाव आयोग ने रिपोर्ट के दावे पर क्या कहा?
वहीं, चुनाव आयोग के सूत्रों ने इन खबरों के बाद कहा है कि SIR समेत आयोग के सभी फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी से लिए गए और फैसलों पर सहमति थी। आयोग के अनुसार, दोनों आयुक्तों ने कुछ मुद्दों पर सवाल या आपत्तियां जरूर उठाईं, लेकिन इससे यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि आयोग के फैसले असहमति के कारण अमान्य थे। इस तरह, एक ओर दो चुनाव आयुक्तों की ओर से दर्ज आपत्तियों की रिपोर्ट सामने आई है, वहीं चुनाव आयोग ने अपने फैसलों को सर्वसम्मति से लिया गया बताया है। इस विवाद पर राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आ रही हैं।




















