Samachar Post रिपोर्टर, रांची : झारखंड की राजधानी रांची में पहली बार ऑल इंडिया ऑप्थल्मोलॉजिकल सोसाइटी (AIOS) की 5वीं मिडटर्म राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस आयोजित होने जा रही है। 25 से 27 सितंबर तक होटल चाणक्य बीएनआर में होने वाले इस तीन दिवसीय सम्मेलन में देशभर से 1,000 से अधिक नेत्र विशेषज्ञ, शोधकर्ता, शिक्षाविद और युवा चिकित्सक हिस्सा लेंगे। सम्मेलन को लेकर गुरुवार को कश्यप मेमोरियल आई हॉस्पिटल के सभागार में प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई। आयोजन समिति ने बताया कि यह झारखंड में नेत्र चिकित्सा के क्षेत्र में होने वाला पहला राष्ट्रीय स्तर का सम्मेलन है।
रांची को राष्ट्रीय अकादमिक केंद्र के रूप में विकसित करने का लक्ष्य
ऑर्गनाइजिंग सेक्रेटरी डॉ. भारती कश्यप ने कहा कि रांची में AIOS की राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस का आयोजन झारखंड के लिए महत्वपूर्ण अवसर है। उन्होंने बताया कि सम्मेलन का उद्देश्य चिकित्सा शिक्षा, शोध और वैज्ञानिक अवसरों को बड़े शहरों तक सीमित रखने के बजाय मिड-टियर शहरों तक पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि देश के विशेषज्ञों के अनुभव और आधुनिक सर्जिकल तकनीकों के आदान-प्रदान से झारखंड के नेत्र चिकित्सकों की दक्षता बढ़ेगी। इसका लाभ राज्य के मरीजों को भी मिलने की उम्मीद है।
आधुनिक उपचार तकनीकों पर होगा विचार-विमर्श
ऑर्गनाइजिंग चेयरमैन डॉ. बी. पी. कश्यप ने कहा कि सम्मेलन झारखंड में नेत्र चिकित्सा के क्षेत्र में नई संभावनाओं का मंच तैयार करेगा। देश के वरिष्ठ विशेषज्ञ अपनी विशेषज्ञता और आधुनिक तकनीकों की जानकारी स्थानीय और युवा चिकित्सकों के साथ साझा करेंगे। उन्होंने कहा कि इससे गंभीर और जटिल नेत्र रोगों के उपचार में चिकित्सकों की क्षमता को और मजबूत करने में मदद मिलेगी।
जटिल सर्जरी और नेत्र रोगों पर विशेष चर्चा
डॉ. प्रीतेश प्रणॉय ने बताया कि सम्मेलन में अत्याधुनिक सर्जिकल तकनीकों और जटिल नेत्र विकारों के उपचार पर विस्तार से चर्चा होगी। राष्ट्रीय स्तर के विशेषज्ञों के साथ संवाद और केस आधारित चर्चा से स्थानीय चिकित्सकों को कठिन मामलों के प्रबंधन की बेहतर समझ मिलने की उम्मीद है।
युवा डॉक्टरों और PG छात्रों के लिए विशेष सत्र
डॉ. निलेंदु मिश्रा ने कहा कि यह सम्मेलन युवा नेत्र चिकित्सकों और पोस्ट ग्रेजुएट छात्रों के लिए विशेष रूप से उपयोगी रहेगा। वैज्ञानिक सत्रों, केस डिस्कशन और शैक्षणिक कार्यक्रमों के जरिए प्रतिभागियों को आधुनिक शोध और क्लिनिकल गाइडलाइंस को समझने का अवसर मिलेगा। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन युवा चिकित्सकों को राष्ट्रीय स्तर के विशेषज्ञों से सीखने और अपने अनुभव साझा करने का मंच प्रदान करते हैं।
AI और नई लेजर तकनीकों पर भी रहेगा जोर
डॉ. सुजेत समंता ने कहा कि नेत्र विज्ञान में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, उन्नत डायग्नोस्टिक्स और नई लेजर तकनीकों का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। सम्मेलन के दौरान इन तकनीकों और उनके क्लिनिकल उपयोग पर भी चर्चा होगी। आयोजन समिति के अनुसार, सम्मेलन के जरिए झारखंड के चिकित्सकों को नई तकनीकों और वैश्विक स्तर पर हो रहे बदलावों से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा। इससे राज्य में नेत्र जांच और अंधापन निवारण से संबंधित सेवाओं को भी नई दिशा मिलने की उम्मीद है।
तीन दिनों तक चलेगा वैज्ञानिक और शैक्षणिक कार्यक्रम
25 से 27 सितंबर तक होने वाले सम्मेलन में आधुनिक नेत्र चिकित्सा, नवीन उपचार पद्धतियों, वैज्ञानिक शोध, सर्जिकल तकनीकों और युवा चिकित्सकों के लिए विशेष शैक्षणिक सत्र आयोजित किए जाएंगे। आयोजन समिति ने इसे झारखंड की चिकित्सा और अकादमिक क्षमता को राष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुत करने का महत्वपूर्ण अवसर बताया है।


















