- चार महीने बाद भी जांच पर विवाद, परिवार ने राज्यपाल से मिलकर की सीबीआई या स्वतंत्र एजेंसी से जांच की मांग
Samachar Post रिपोर्टर, पलामू : चर्चित राजमणी पाठक हत्याकांड में पुलिस की जांच पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। पुलिस ने जिस मामले में जमीन विवाद को लेकर टांगी से वार कर हत्या किए जाने का दावा करते हुए एक आरोपित को गिरफ्तार कर जेल भेजा था, उसी मामले की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सिर में गोली लगने और बारूद के अंश मिलने की बात सामने आई है। पुलिस के दावे और मेडिकल साक्ष्यों में इस विरोधाभास के बाद पूरे अनुसंधान की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो गए हैं।
मृतक की पत्नी पूनम देवी और पुत्र मुकेश पाठक ने राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार से मुलाकात कर मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। परिवार ने सीबीआई अथवा किसी स्वतंत्र जांच एजेंसी से निष्पक्ष जांच कराने की मांग उठाई है।
29 अप्रैल को मिला था शव, 9 मई को हुई गिरफ्तारी
राजमणी पाठक का शव 29 अप्रैल को पिपराटांड थाना क्षेत्र के करमा गांव में बरामद हुआ था। पुलिस ने अनुसंधान के बाद 9 मई को वीरेंद्र सिंह को गिरफ्तार किया था। पुलिस का दावा था कि जमीन विवाद में टांगी से वार कर राजमणी की हत्या की गई। आरोपित के स्वीकारोक्ति बयान के आधार पर हत्या में प्रयुक्त टांगी बरामद करने की भी बात कही गई थी। हालांकि, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सिर में गोली लगने और बारूद के अंश मिलने की पुष्टि होने के बाद पुलिस की इस जांच पर सवाल उठने लगे हैं।

एसपी बोले- डॉक्टर ने गलत रिपोर्ट बनाई, सुधार के लिए करेंगे पत्राचार
पलामू के पुलिस अधीक्षक कपिल चौधरी ने कहा कि पुलिस जांच में गोली लगने के कोई साक्ष्य नहीं मिले हैं और घटनास्थल से कोई खोखा भी बरामद नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि जांच में सामने आए तथ्यों के अनुसार राजमणी पाठक की मौत कुल्हाड़ी के वार से हुई थी और हथियार बरामद किया जा चुका है।
एसपी ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर सवाल उठाते हुए कहा कि डॉक्टर ने गलत रिपोर्ट तैयार की है। उन्होंने बताया कि रिपोर्ट में सुधार के लिए मेदिनीराय मेडिकल कॉलेज अस्पताल के अधीक्षक से पत्राचार किया जाएगा।
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पत्नी ने दो लोगों के खिलाफ दर्ज कराई थी प्राथमिकी
मृतक की पत्नी पूनम देवी ने प्राथमिकी में चंद्रपुर गांव निवासी संजय सिंह और अंदुल सिंह का नाम दर्ज कराया है। उनका कहना है कि जिस पेड़ के नीचे राजमणी का शव मिला था, उसी स्थान को लेकर करीब एक वर्ष पहले दोनों के साथ विवाद हुआ था। उस दौरान जान से मारने की धमकी दिए जाने का भी आरोप लगाया गया था।
परिवार बोला- चार महीने बाद भी निष्पक्ष जांच नहीं
मृतक के पुत्र मुकेश पाठक ने कहा कि घटना के करीब चार महीने बीत जाने के बाद भी प्रशासन मामले में संतोषजनक तरीके से आगे नहीं बढ़ा है। परिवार का आरोप है कि जिस व्यक्ति ने हत्या स्वीकार करने की बात कही, उसे भी जमानत मिल चुकी है। ऐसे में असली दोषियों तक पहुंचने और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए परिवार ने राज्यपाल से सीबीआई जांच की मांग की है।



